ट्रंप के दामाद और पुतिन की करीबियां, यूक्रेन के लिए खतरे की घंटी जानिए पूरी इनसाइड स्टोरी
News India Live, Digital Desk : रूस और यूक्रेन के बीच चल रही जंग अब एक नए मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। अब तक हमने युद्ध के मैदान में गोले-बारूद बरसते देखे, लेकिन अब असली 'गेम' कूटनीति की मेज पर शुरू हो गया है। हाल ही में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जारेड कुशनर के बीच संपर्क या बैठक की खबरों ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया में सनसनी मचा दी है।
आखिर ये मामला इतना गंभीर क्यों है?
जारेड कुशनर कोई आम शख्स नहीं हैं। वे डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति रहने के दौरान उनके सबसे भरोसेमंद सलाहकार रह चुके हैं। ट्रंप ने हमेशा ये दावा किया है कि अगर वो सत्ता में होते तो रूस-यूक्रेन युद्ध कभी शुरू ही नहीं होता या वो इसे चुटकियों में खत्म कर देते। अब जब ट्रंप की वापसी की सुगबुगाहट तेज है, तो पुतिन का उनके करीबी परिवार के सदस्य के साथ संपर्क में आना यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की के लिए डराने वाली बात है।
जेलेंस्की क्यों हैं परेशान?
यूक्रेन की पूरी ताकत अमेरिका और पश्चिमी देशों से मिलने वाली सैन्य मदद पर टिकी है। जेलेंस्की को डर है कि अगर ट्रंप के करीबी लोग पुतिन के साथ किसी तरह का समझौता कर लेते हैं, तो भविष्य में अमेरिका यूक्रेन को दी जाने वाली करोड़ों डॉलर की मदद और हथियारों की सप्लाई रोक सकता है। खबरों की मानें तो इस घटनाक्रम ने जेलेंस्की को इतना परेशान कर दिया है कि इसे उनके खेमे की 'घबराहट' के तौर पर देखा जा रहा है।
क्या यह किसी बड़े समझौते की शुरुआत है?
पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स का मानना है कि रूस अब अमेरिका में सत्ता परिवर्तन की आहट को भांप रहा है। पुतिन जानते हैं कि जो बाइडन के मुकाबले ट्रंप का रुख रूस के प्रति नरम रह सकता है। जारेड कुशनर जैसे लोग इसमें 'मिडिएटर' यानी मध्यस्थ की भूमिका निभा सकते हैं। लेकिन सवाल वही है अगर शांति का कोई रास्ता निकलता है, तो क्या यूक्रेन को अपनी जमीन का बड़ा हिस्सा रूस को सौंपना होगा? यही वो बात है जो जेलेंस्की को चैन की नींद सोने नहीं दे रही।
आगे क्या होगा?
दुनिया की निगाहें अब वॉशिंगटन और मॉस्को के बीच के इन 'अनौपचारिक' रिश्तों पर टिकी हैं। अगर यह संपर्क बढ़ता है, तो हो सकता है कि आने वाले कुछ महीनों में यूक्रेन की जंग का नक्शा पूरी तरह बदल जाए। फिलहाल के लिए, इस एक खबर ने दुनिया को दो गुटों में बांट दिया है और यूक्रेन के लिए खतरे की घंटी बजा दी है।