इजरायल की नो-एंट्री गजा में पाकिस्तान का आना क्यों नहीं चाहता नेतन्याहू का देश? ट्रंप के शांति मिशन में आया नया मोड़
News India Live, Digital Desk : डोनाल्ड ट्रंप जब भी चर्चा में आते हैं, तो अपने साथ कोई न कोई बड़ा और चौंकाने वाला प्लान लेकर आते हैं। इन दिनों वे गजा में शांति बहाली के लिए एक 'बोर्ड ऑफ पीस' (Board of Peace) या एक खास राजनयिक फ्रेमवर्क तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं। चर्चा है कि इस प्रक्रिया में कुछ मुस्लिम देशों को भी शामिल किया जा सकता है। लेकिन जैसे ही पाकिस्तान का नाम इस लिस्ट के आसपास दिखा, इजरायल ने अपनी असहजता साफ जाहिर कर दी।
आखिर इजरायल को पाकिस्तान से दिक्कत क्या है?
इसे समझना बहुत मुश्किल नहीं है। असल में, पाकिस्तान और इजरायल के बीच कोई भी औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं। पाकिस्तान दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल है जो इजरायल को एक राष्ट्र के तौर पर मान्यता तक नहीं देते। पाकिस्तान के पासपोर्ट पर तो बाकायदा लिखा होता है कि आप 'इजरायल' को छोड़कर दुनिया के किसी भी देश में जा सकते हैं।
ऐसे में इजरायल का यह सोचना स्वाभाविक है कि जो देश उसे पहचानता ही नहीं, वो उसके घर (गजा के मामले में सुरक्षा हितों) में शांति कैसे करवा सकता है? इजरायल को डर है कि अगर पाकिस्तान जैसी कट्टर सोच रखने वाली ताकत गजा में किसी भी भूमिका में आती है, तो इससे सुरक्षा का संकट बढ़ सकता है।
ट्रंप का 'शांति वाला बोर्ड' और चुनौतियां
डोनाल्ड ट्रंप चाहते हैं कि अरब देशों के साथ मिलकर गजा का भविष्य तय किया जाए। उनके करीबी और जानकार इस कोशिश में हैं कि कुछ बड़े इस्लामिक देशों को 'पीसकीपिंग' या प्रशासन संभालने में हिस्सा बनाया जाए। लेकिन इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनकी सरकार उन देशों को ही प्राथमिकता देना चाहती है जिनसे उनके संबंध ठीक हैं, जैसे संयुक्त अरब अमीरात (UAE) या बहरीन।
बात सिर्फ कूटनीति की नहीं, भरोसे की है
इजरायली सूत्रों का कहना है कि वे किसी ऐसे देश को गजा के पास भी नहीं देखना चाहते जो खुलकर चरमपंथी विचारधारा का समर्थन करता हो या जिसके अपने ही देश में स्थिरता की कमी हो। इजरायल के लिए गजा का मुद्दा सीधे-सीधे उसकी सुरक्षा से जुड़ा है, और वे यहाँ किसी भी 'बाहरी जोखिम' को उठाने के मूड में नहीं हैं।
कुल मिलाकर, ट्रंप का जो पीस प्लान कागज पर जितना शानदार दिख रहा है, उसे जमीन पर उतारना उतना ही चुनौतीपूर्ण है। एक तरफ ट्रंप सबको साथ लेकर चलना चाहते हैं, तो दूसरी तरफ इजरायल की अपनी शर्तें हैं। देखना होगा कि ट्रंप इस 'ईगो और डिप्लोमेसी' की जंग को कैसे सुलझाते हैं।