तमिलनाडु के चुनावी रण में मोदी का सीधा हमला, भ्रष्ट राजशाही से लेकर विरासत तक क्या है बीजेपी का दक्षिण प्लान?
News India Live, Digital Desk : तमिलनाडु में राजनीति हमेशा से ही 'द्रविड़ अस्मिता' के इर्द-गिर्द रही है, लेकिन इस बार भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस चुनावी खेल के नियम बदलते हुए दिख रहे हैं। पीएम मोदी जब भी दक्षिण भारत के दौर पर जाते हैं, तो वह न केवल राजनीति की बात करते हैं, बल्कि तमिल संस्कृति और भाषा को जो सम्मान देते हैं, वह लोगों से जुड़ने का एक नया जरिया बन गया है।
हाल ही में हुई एक रैली में पीएम मोदी का अंदाज़ कुछ अलग ही था। उन्होंने तमिलनाडु की मौजूदा डीएमके सरकार पर सीधा और करारा प्रहार किया। उन्होंने 'परिवारवाद' और 'भ्रष्टाचार' को अपनी स्पीच का केंद्र रखा। उनका कहना था कि डीएमके शासन ने तमिलनाडु के भविष्य को अंधेरे में धकेला है और अब जनता इस 'कुशासन' से मुक्ति चाहती है।
पीएम ने जिस तरह से "डीएमके के भ्रष्ट शासन की उल्टी गिनती शुरू" होने की बात कही, उससे साफ़ है कि आगामी चुनावों के लिए एनडीए (NDA) ने अपनी बिसात बिछा दी है। रैलियों में जुटी भीड़ और लोगों के बीच की चर्चा इशारा कर रही है कि बीजेपी इस बार तमिलनाडु में सिर्फ 'दखल' नहीं, बल्कि एक 'मजबूत विकल्प' के रूप में खुद को पेश कर रही है।
अक्सर कहा जाता है कि दक्षिण की राजनीति जीतना दिल्ली के लिए बड़ी चुनौती होती है, लेकिन पीएम मोदी के कड़े तेवरों ने सत्तारूढ़ दल की पेशानियों पर बल ज़रूर डाल दिए होंगे। उन्होंने भ्रष्टाचार के उन आरोपों को जनता के बीच रखा जो डीएमके के नेताओं से जुड़े हैं और कहा कि राज्य की तरक्की तभी संभव है जब सत्ता परिवार के चंगुल से निकले।
अब देखना दिलचस्प होगा कि सीएम एमके स्टालिन और उनकी टीम मोदी के इस आक्रामक हमले का क्या जवाब देती है। तमिलनाडु के आम लोगों के मन में क्या चल रहा है, ये तो वक्त बताएगा, लेकिन इतना तो तय है कि 2026 का रास्ता काफी पेचीदा और धमाकेदार होने वाला है। आपका इस पर क्या सोचना है? क्या वाकई मोदी का ये मैजिक तमिलनाडु में काम करेगा?