ब्रेस्ट कैंसर की रिपोर्ट से घबराएं नहीं, मेडिकल साइंस के इन 5 बदलावों ने अब मरीज़ों की राह कर दी है आसान
News India Live, Digital Desk : हम सभी ने कभी न कभी सुना है कि कैंसर के इलाज में कीमोथेरेपी (Chemo) और उसके साइड इफेक्ट्स कितने दर्दनाक हो सकते हैं। लेकिन अगर हम आज की बात करें, तो अब पूरा फ़ोकस सिर्फ़ 'बीमारी मारने' पर नहीं, बल्कि मरीज़ की मानसिक और शारीरिक भलाई पर भी है। ऐसी कई एडवांस थेरेपी (Advanced Therapies) आ चुकी हैं जो एक सर्वाइवर को अस्पताल से बाहर आने के बाद अपनी पुरानी ज़िंदगी को दोबारा खुलकर जीने में मदद कर रही हैं।
सबसे पहले बात आती है 'टार्गेटेड थेरेपी' (Targeted Therapy) की। इसे आप ऐसे समझ सकते हैं जैसे किसी निशानेबाज का अचूक निशाना। पुराने समय में इलाज से अच्छे सेल्स को भी नुकसान पहुँचता था, लेकिन अब ऐसी दवाएं आ गई हैं जो सिर्फ़ कैंसर वाली कोशिकाओं को ढूंढकर उन्हें खत्म करती हैं। इसका मतलब है कि बाल गिरना या कमजोरी जैसे साइड इफेक्ट्स अब काफी हद तक कम किए जा सकते हैं।
दूसरी बड़ी चीज़ है इम्युनोथेरेपी (Immunotherapy)। यहाँ डॉक्टर आपके शरीर के अंदर की ही 'रोग प्रतिरोधक क्षमता' को जगाते हैं ताकि वो खुद कैंसर से लड़ सके। इससे शरीर का कुदरती ढांचा मज़बूत बना रहता है और मरीज़ जल्द ही रिकवर महसूस करने लगता है।
इसके साथ ही, आजकल सर्जरी करने का तरीका भी बहुत 'पर्सनलाइज्ड' (Personalized) हो गया है। अब सिर्फ़ बीमारी हटाने की बात नहीं होती, बल्कि यह भी देखा जाता है कि महिला के आत्म-सम्मान और शरीर की सुंदरता पर कोई आंच न आए। ब्रेस्ट को सुरक्षित रखते हुए किए जाने वाले ऑपरेशन अब आम हो रहे हैं, जिससे इलाज के बाद महिला का कॉन्फिडेंस कम नहीं होता।
इसके अलावा, आज का डॉक्टर दवा के साथ-साथ मरीज़ की डाइट, एक्सरसाइज़ और मानसिक स्वास्थ्य पर भी उतना ही ज़ोर देता है। यह समझना ज़रूरी है कि ब्रेस्ट कैंसर के साथ भी महिलाएं अपना काम, अपना शौक और अपनी ज़िंदगी को पूरी आज़ादी से एन्जॉय कर रही हैं।
कहते हैं कि डर को खत्म करने का सबसे बड़ा तरीका जानकारी है। आज मेडिकल साइंस इतना समर्थ है कि शुरूआती जांच (Early Diagnosis) से लेकर एडवांस्ड केयर तक, आपको हर मोड़ पर एक बेहतर ज़िंदगी जीने की गारंटी देता है।