एस. जयशंकर का स्वैग फिर चर्चा में अफगानी छात्र के जज़्बातों पर विदेश मंत्री ने दिल जीत लिया
News India Live, Digital Desk: हमारे विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर का अंदाज़ हम सब जानते हैं। जब वो बोलने पर आते हैं, तो सामने वाले की बोलती बंद हो जाती है, और जब वो मज़ाक करते हैं, तो पूरा हॉल ठहाकों से गूंज उठता है। अभी हाल ही में पुणे में अपनी किताब 'व्हाई भारत मैटर्स' (Why Bharat Matters) के लॉन्च पर कुछ ऐसा ही हुआ, जिसने सोशल मीडिया पर फिर से उनकी वाहवाही शुरू कर दी है।
आखिर हुआ क्या था उस इवेंट में?
बात दरअसल यह थी कि कार्यक्रम के दौरान दर्शकों के बीच से सवाल-जवाब का दौर चल रहा था। उसी भीड़ में एक अफगानी छात्र खड़ा हुआ। अक्सर हम देखते हैं कि नेता लोगों के कार्यक्रमों में कुछ लोग पहले से सेट होते हैं जो सिर्फ तारीफ करने के लिए सवाल पूछते हैं। लेकिन यहाँ मामला उल्टा पड़ गया—या यूं कहें कि इतना "परफेक्ट" हो गया कि खुद मंत्री जी को सफाई देनी पड़ गई!
उस अफगानी लड़के ने जयशंकर जी से कुछ नहीं पूछा, बल्कि उसने भारत और जयशंकर जी की नीतियों की जमकर तारीफ कर दी। उसका कहना था कि दुनिया चाहे जो भी कहे, लेकिन भारत ने जिस तरह से अफ़ग़ानिस्तान का और वहां के छात्रों का साथ दिया है, वह काबिले-तारीफ है। उस लड़के की बातें इतनी भावुक और सच्ची थीं कि हॉल में बैठे लोग हैरान रह गए।
जयशंकर का "हाजिरजवाबी" अंदाज़
अब यहीं पर आया ट्विस्ट। जैसे ही लड़के ने अपनी बात पूरी की, डॉ. जयशंकर मुस्कुराए। वो जानते थे कि आजकल लोग सोशल मीडिया पर हर चीज़ को 'स्टेप्ड' या 'प्लान किया हुआ' बता देते हैं। इसलिए, इससे पहले कि कोई आलोचक उंगली उठाता, जयशंकर ने खुद माइक संभाला और हँसते हुए बोले—
"देखिए, मैं आप सबको बता दूं, न तो मैं इस लड़के को जानता हूं और न ही ये सवाल पहले से प्लान किया गया है (This is not planted)।"
उनकी यह बात सुनते ही पूरा ऑडिटोरियम तालियों और हंसी से गूंज उठा।
क्यों खास है यह घटना?
यह छोटी सी घटना बहुत बड़ी बात कहती है। यह बताती है कि भारत की इज़्ज़त सिर्फ हमारे देश के अंदर ही नहीं, बल्कि दूसरे देशों के नागरिकों, खास तौर पर युवाओं के दिलों में भी कितनी गहरी है। वह छात्र कोई 'किराए का प्रशंसक' नहीं था, बल्कि एक ऐसा युवा था जिसे भारत की मदद से उम्मीद मिली है।
जयशंकर का वो वन-लाइनर जवाब उन आलोचकों के मुंह पर ताला लगाने जैसा था, जो सोचते हैं कि भारत की साख सिर्फ कागज़ों पर है। असलियत तो यह है कि जब काम अच्छा होता है, तो तारीफ 'प्लांट' नहीं करनी पड़ती, वो अपने आप दिल से निकलती है।
आजकल जहाँ हर चीज़ में मिलावट का शक होता है, वहां विदेश मंत्री का यह बेबाक और सच्चा अंदाज़ ही तो है जो उन्हें बाकी नेताओं से अलग बनाता है। आपको कैसा लगा उनका ये जवाब?