India's Oil Strategy : ईरान-अमेरिका जंग के बीच भारत का प्लान-B तैयार खाड़ी देशों की जगह अब इन 5 देशों से आएगा तेल नहीं होने दी जाएगी किल्लत

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News India Live, Digital Desk : भारत अब अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए खाड़ी देशों (Gulf Countries) पर निर्भरता कम कर रूस और लैटिन अमेरिकी देशों से आयात बढ़ाने की तैयारी में है। भारत अपनी जरूरत का 88% से अधिक कच्चा तेल आयात करता है, जिसमें से लगभग 50% (2.5-2.7 मिलियन बैरल प्रतिदिन) होर्मुज के रास्ते खाड़ी देशों (इराक, सऊदी अरब, यूएई) से आता है। इस रास्ते के बंद होने के बाद भारत ने अब अपनी नजरें उन देशों पर टिका दी हैं जो इस युद्ध क्षेत्र से दूर हैं।

1. रूसी कच्चे तेल की फिर से होगी 'वापसी' (The Return of Russian Oil)

तैयारी: हाल ही में भारत ने अमेरिका के दबाव में रूसी तेल के आयात में कमी की थी (जनवरी 2026 में यह 20% से नीचे आ गया था), लेकिन अब सरकार ने फिर से रूस को प्राथमिकता देने का मन बनाया है।

फायदा: रूसी तेल के जहाज होर्मुज के रास्ते के बजाय दूसरे समुद्री मार्गों से आते हैं, जो सुरक्षित हैं। साथ ही, 'फ्लोटिंग स्टोरेज' (Floating Storage) में मौजूद रूसी कार्गो को जल्दी भारत लाया जा सकता है।

2. 'प्लान-B' के 5 मुख्य विकल्प (Alternative Sources)

भारत सरकार और रिफाइनरीज ने निम्नलिखित क्षेत्रों से तेल आयात बढ़ाने के लिए संपर्क तेज कर दिया है:

रूस: सबसे भरोसेमंद विकल्प, जो तत्काल कमी को पूरा कर सकता है।

अमेरिका (USA): अमेरिका से तेल और LNG का आयात बढ़ाना एक रणनीतिक विकल्प है।

लैटिन अमेरिका: ब्राजील और वेनेजुएला जैसे देशों से लंबी दूरी के बावजूद तेल मंगाने पर विचार हो रहा है।

पश्चिम अफ्रीका: नाइजीरिया और अंगोला से तेल की खेप बढ़ाने की योजना है।

मध्य एशिया: कजाकिस्तान जैसे देशों से भी संपर्क किया जा रहा है।

3. भारत के पास कितना 'स्टॉक' है? (Strategic Reserves)

घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि भारत के पास आपात स्थिति के लिए पर्याप्त भंडार है:

Strategic Reserves (SPR): भारत के पास विशाखापत्तनम, मंगलुरु और पादुर में भूमिगत भंडार हैं जो लगभग 9.5 दिनों की जरूरत पूरी कर सकते हैं।

Refinery Stock: भारतीय रिफाइनरीज के पास अपने खुद के भंडार हैं, जो कुल मिलाकर देश को 65 से 74 दिनों तक का 'कवर' (Cover) प्रदान करते हैं।

4. सबसे बड़ी चुनौती: 'एलपीजी' (LPG Crisis)

जबकि कच्चे तेल के विकल्प मौजूद हैं, LPG (रसोई गैस) की स्थिति चुनौतीपूर्ण है:

90% निर्भरता: भारत अपनी रसोई गैस का 90% हिस्सा खाड़ी देशों से मंगाता है।

राशनिंग की आशंका: यदि होर्मुज का रास्ता लंबे समय तक बंद रहा, तो सरकार ग्रामीण इलाकों या उन ग्राहकों के लिए LPG राशनिंग (LPG Rationing) लागू कर सकती है जिनके पास वैकल्पिक ईंधन मौजूद है।

5. क्या बढ़ेंगे दाम?

कच्चे तेल की कीमतें $80 प्रति बैरल के पार जा चुकी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि हर $1 की बढ़ोत्तरी भारत के आयात बिल को $2 बिलियन बढ़ा देती है। हालांकि, सरकार फिलहाल घरेलू स्तर पर पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर रखने की कोशिश कर रही है।