World War 3 : ईरान ने बंद किया 'होर्मुज का रास्ता भारत में ₹200 पार होगा पेट्रोल? जानें क्यों दुनिया के लिए डेथ वारंट है यह कदम

Post

News India Live, Digital Desk: खाड़ी देशों से होने वाले तेल निर्यात की लाइफलाइन कहे जाने वाले होर्मुज स्ट्रेट को बंद करना ईरान का अब तक का सबसे बड़ा जवाबी कदम है। यह फैसला 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल द्वारा किए गए हमलों के बाद लिया गया है, जिसमें कथित तौर पर ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु हो गई थी।

1. क्यों 'होर्मुज' का बंद होना पूरी दुनिया के लिए खतरा है?

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे व्यस्त और रणनीतिक तेल मार्ग है:

20% तेल सप्लाई: दुनिया के कुल कच्चे तेल की खपत का लगभग पाँचवा हिस्सा (20%) इसी 33 किमी चौड़े रास्ते से गुजरता है।

प्रमुख निर्यातक: सऊदी अरब, इराक, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कुवैत और कतर अपना अधिकांश तेल और गैस इसी रास्ते से दुनिया को भेजते हैं।

कोई विकल्प नहीं: कुवैत और कतर जैसे देशों के पास तेल निर्यात के लिए इस रास्ते के अलावा कोई दूसरा समुद्री विकल्प नहीं है।

2. भारत की मुश्किलें कैसे बढ़ेंगी? (Impact on India)

भारत अपनी जरूरत का लगभग 85-90% कच्चा तेल आयात करता है, जिसमें से एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से आता है:

महंगाई का विस्फोट: कच्चे तेल की कीमतें $100 से $150 प्रति बैरल के पार जा सकती हैं। इससे भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भारी उछाल आएगा।

LPG और LNG संकट: भारत अपनी 60% प्राकृतिक गैस (LNG) इसी रास्ते से मंगाता है। रसोई गैस और सीएनजी की सप्लाई प्रभावित हो सकती है।

करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD): तेल महंगा होने से भारत का विदेशी मुद्रा भंडार तेजी से घटेगा, जिससे रुपया और कमजोर हो सकता है।

3. ईरान की घातक चेतावनी: "धधक उठेंगे जहाज"

ईरानी जनरल इब्राहिम जब्बारी ने सरकारी मीडिया के जरिए सीधा संदेश दिया है:

"होर्मुज की जलसीमा बंद है। यदि किसी ने भी इसे पार करने का साहस किया, तो रिवोल्यूशनरी गार्ड्स और हमारी नौसेना उन जहाजों को आग के हवाले कर देगी।"

4. क्या है भारत का 'बैकअप प्लान'?

भारत सरकार स्थिति पर बारीकी से नजर रखे हुए है और वैकल्पिक इंतजामों पर विचार कर रही है:

रूस से आयात: भारत रूस से आने वाले तेल की मात्रा बढ़ा सकता है, जो इस रास्ते के बजाय दूसरे समुद्री मार्ग से आता है।

सामरिक तेल भंडार (SPR): भारत अपने भूमिगत तेल भंडारों (जो लगभग 9-10 दिनों के लिए पर्याप्त हैं) का उपयोग कर सकता है।

पाइपलाइन रूट: सऊदी अरब और यूएई के पास कुछ ऐसी पाइपलाइनें हैं जो होर्मुज को बाईपास कर लाल सागर तक जाती हैं, भारत वहां से सप्लाई लेने की कोशिश कर सकता है।