ताइवान की सरहद पर चीनी लड़ाकू विमानों की दहाड़, हड़कंप के बीच रोकी गई उड़ानें,आखिर क्या चाहते हैं जिनपिंग?
News India Live, Digital Desk: दुनिया एक बार फिर से युद्ध की आशंकाओं को लेकर फिक्रमंद है। रूस-यूक्रेन और मध्य पूर्व (Middle East) के तनाव के बाद अब सबकी नजरें पूर्वी एशिया पर टिकी हैं, जहां चीन और ताइवान के बीच खींचतान अपने चरम पर पहुँच गई है। हालात इतने नाजुक हो गए हैं कि न केवल सैन्य मोर्चे पर सरगर्मी बढ़ गई है, बल्कि इसका सीधा असर अब आम जनता और अंतर्राष्ट्रीय यात्राओं पर भी दिखने लगा है।
चीन का घेराव और युद्ध जैसा माहौल
बीते कुछ घंटों में जो तस्वीरें और खबरें ताइवान से आई हैं, वो वाकई चिंताजनक हैं। चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने ताइवान को लगभग तीन या चारों तरफ से घेरकर सैन्य अभ्यास शुरू कर दिया है। इसे 'शक्ति प्रदर्शन' कहना कम होगा, क्योंकि चीन के दर्जनों फाइटर जेट और जंगी जहाज ताइवान की सीमा के बेहद करीब देखे गए हैं।
ऐसा लग रहा है जैसे चीन यह संदेश देना चाहता है कि वह जब चाहे इस द्वीप को दुनिया से पूरी तरह अलग-थलग कर सकता है। ताइवान की सुरक्षा एजेंसियां भी पूरी तरह अलर्ट पर हैं और हर हलचल का जवाब देने की तैयारी में जुटी हैं।
हवाई सफर पर पड़ा बुरा असर
इस तनाव का सबसे पहला शिकार बना है 'विमानन क्षेत्र' (Aviation Sector)। जब सरहद पर मिसाइलों और जेट्स की तैनाती बढ़ती है, तो सबसे पहले एयरस्पेस (आसमान) असुरक्षित हो जाता है। खबर है कि सुरक्षा कारणों से ताइवान आने और वहां से जाने वाली कई फ्लाइट्स को रद्द करना पड़ा है। कई विदेशी विमानों ने अपना रूट बदल लिया है, जिससे हवाई यात्रा न केवल महंगी हो गई है, बल्कि मुसाफिरों के बीच भी खौफ का माहौल है।
जो लोग ताइवान की यात्रा करने वाले थे या वहां फंसे हुए हैं, उनके लिए यह अनिश्चितता काफी भारी पड़ रही है। एयरपोर्ट्स पर भीड़ बढ़ रही है और उड़ानें रद्द होने की वजह से आम लोग परेशान हैं।
क्यों मचा है ये घमासान?
देखा जाए तो यह विवाद काफी पुराना है। चीन, ताइवान को अपना हिस्सा मानता है, जबकि ताइवान खुद को एक लोकतांत्रिक और स्वतंत्र राष्ट्र के तौर पर देखता है। समय-समय पर जब भी ताइवान अपनी स्वायत्तता की बात करता है या किसी विदेशी देश (खासकर अमेरिका) से सैन्य मदद लेता है, तो चीन इसी तरह की सैन्य ड्रिल करके अपनी नाराजगी जताता है। लेकिन जानकारों का कहना है कि इस बार का घेराव पिछले अनुभवों से ज्यादा सख्त और डरावना नजर आ रहा है।
क्या ये युद्ध की शुरुआत है?
अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी, लेकिन डिप्लोमेसी यानी कूटनीति की दुनिया में ऐसे घेराव को खतरे की घंटी माना जाता है। पूरी दुनिया इस समय अपील कर रही है कि मामला बातचीत से सुलझ जाए, क्योंकि अगर इस क्षेत्र में संघर्ष बढ़ता है, तो उसका असर ग्लोबल ट्रेड (Global Trade) और टेक सप्लाई चेन (चिप्स की कमी) पर बुरी तरह पड़ेगा।
फिलहाल, ताइवान के आसमान में फाइटर जेट्स की आवाजें वहां की जनता को डरा रही हैं। आने वाले कुछ दिन काफी महत्वपूर्ण होने वाले हैं कि चीन अपनी सेना पीछे हटाता है या ये तनाव कोई और नया रुख लेगा।