बांग्लादेश की नई कूटनीति क्यों दिल्ली में तैनात मुस्तफ़िज़ुर रहमान को आनन-फानन में वापस लौटना पड़ा?

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News India Live, Digital Desk : कूटनीति (Diplomacy) की दुनिया में अक्सर सब कुछ बहुत शांत दिखता है, लेकिन पर्दे के पीछे जो होता है, वह चौंका देने वाला होता है। ताज़ा हलचल भारत और बांग्लादेश के रिश्तों के बीच दिख रही है। खबर है कि भारत में तैनात बांग्लादेश के हाई कमिश्नर मोहम्मद मुस्तफ़िज़ुर रहमान को 'अर्जेंट' आधार पर ढाका बुला लिया गया है और वह ढाका पहुँच भी चुके हैं।

इसे सामान्य तबादला समझें या कुछ और?
जब भी किसी बड़े देश से उसके सबसे अहम पड़ोसी देश के राजदूत को अचानक बुलाया जाता है, तो चर्चाएँ तेज़ हो जाती हैं। मुस्तफ़िज़ुर रहमान को इस तरह बुलाए जाने के पीछे कई मायने निकाले जा रहे हैं। जानकारों का कहना है कि यह कोई नियमित रूटीन का हिस्सा नहीं है, बल्कि इसके पीछे ढाका में बदलती हुई राजनीति और वहां की अंतरिम सरकार की नई कूटनीतिक दिशा हो सकती है।

दिल्ली से ढाका तक का सफर और अनकही बातें
बांग्लादेश में तख्तापलट के बाद से ही भारत के साथ उसके रिश्ते एक 'अजीब से दौर' से गुज़र रहे हैं। कभी तीखी बयानबाजी, कभी सद्भावना के संदेश। ऐसे में सबसे महत्वपूर्ण पद पर बैठे अधिकारी को वापस बुलाना यह संकेत देता है कि शायद अब बांग्लादेश की नई सरकार अपनी विदेश नीति को बिल्कुल नए सिरे से 'रिसेट' करने की तैयारी में है। मुस्तफ़िज़ुर रहमान काफी समय से दिल्ली में थे और वह पुराने समीकरणों को अच्छी तरह समझते थे।

बड़े पैमाने पर फेरबदल की शुरुआत?
दिलचस्प बात यह है कि मुस्तफ़िज़ुर रहमान अकेले नहीं हैं। चर्चा यह भी है कि बांग्लादेश केवल दिल्ली ही नहीं, बल्कि न्यूयॉर्क, लंदन और पेरिस जैसे अहम केंद्रों से भी अपने पुराने राजदूतों को हटाकर नई नियुक्तियां कर सकता है। इसे वहां की मौजूदा सरकार की 'क्लीन-अप' प्रक्रिया के तौर पर भी देखा जा रहा है। वह अपनी टीम में उन चेहरों को जगह देना चाहते हैं जो वर्तमान सत्ता की सोच के साथ कदम से कदम मिलाकर चल सकें।

आगे क्या होगा?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि भारत के लिए इसके क्या मायने हैं। जब कोई राजदूत हटता है और नया आता है, तो कुछ समय के लिए कम्युनिकेशन यानी बातचीत की रफ्तार धीमी हो जाती है। क्या भारत और बांग्लादेश के रिश्ते में आ रही ये ठंडक जल्द कम होगी या नई नियुक्तियां होने तक दिल्ली को इंतज़ार करना पड़ेगा?

कूटनीति के गलियारों में अब सबकी नजरें इस पर टिकी हैं कि बांग्लादेश भारत के लिए अपना नया दूत किसे चुनता है। क्या वह कोई ऐसा चेहरा होगा जो पुराने घावों पर मरहम लगाएगा, या रिश्तों की दूरी अभी और बढ़ने वाली है?