अयोध्या से एवरेस्ट तक एक भक्त का अद्भुत जुनून, जिसने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर फहराया धर्म ध्वज

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News India Live, Digital Desk : राम नाम की महिमा सिर्फ अयोध्या तक सीमित नहीं है, बल्कि यह धरती के सबसे ऊंचे शिखर तक पहुंच चुकी है। हाल ही में एक ऐसी खबर सामने आई है जो हर सनातनी और भारतवासी का सीना गर्व से चौड़ा कर देगी। यह कहानी सिर्फ एक पहाड़ चढ़ने की नहीं है, बल्कि यह कहानी है उस अटूट आस्था की, जिसने माउंट एवरेस्ट (सागरमाथा) की बर्फीली चोटियों पर प्रभु श्री राम का विजय पताका फहरा दिया है।

आस्था की उड़ान: अयोध्या से एवरेस्ट तक
कल्पना कीजिए, हजारों फीट की ऊंचाई, हड्डियों को जमा देने वाली ठंड और वहां हाथों में प्रभु राम का 'धर्म ध्वज'। जी हां, पर्वतारोही सत्यदीप गुप्ता ने कुछ ऐसा ही कारनामा कर दिखाया है। वे अयोध्या के भव्य राम मंदिर में पूजित (प्राण-प्रतिष्ठित) धर्म ध्वज और प्रभु राम की तस्वीर को अपने साथ लेकर माउंट एवरेस्ट के शिखर पर पहुंचे।

वहां पहुंचकर जब उन्होंने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर यह ध्वज लहराया, तो वह पल न केवल उनके लिए बल्कि पूरी दुनिया में बसे राम भक्तों के लिए ऐतिहासिक बन गया। यह उस विश्वास की जीत थी जो बताता है कि जब राम का नाम साथ हो, तो कोई भी ऊंचाई मुश्किल नहीं होती।

इतिहास के पन्नों में दर्ज होगी निशानी
एवरेस्ट फतह करने के बाद जब सत्यदीप वापस लौटे, तो वे सीधे अयोध्या पहुंचे। उनकी इच्छा थी कि यह पवित्र ध्वज, जिसने दुनिया के सबसे ऊंचे स्थान का सफर तय किया है, वह किसी साधारण जगह पर न रहे।

उन्होंने राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय जी से मुलाकात की। सत्यदीप ने वह ध्वज, प्रभु की तस्वीर और एवरेस्ट अभियान का प्रमाण पत्र उन्हें सौंप दिया। उनकी विनती बहुत ही भावुक और दूरदर्शी है। वे चाहते हैं कि इस ध्वज को राम मंदिर परिसर में बन रहे 'संग्रहालय' (Museum) में रखा जाए।

संग्रहालय में क्यों रखा जाए?
पर्वतारोही का मानना है कि आने वाले 100 या 200 सालों बाद, जब हमारी आने वाली पीढ़ियां उस संग्रहालय में जाएंगी, तो उन्हें पता चलेगा कि उनके पूर्वजों की आस्था कितनी प्रबल थी। यह ध्वज गवाह बनेगा कि राम लला का आशीर्वाद लेकर भक्त एवरेस्ट तक भी जा सकते हैं। चंपत राय जी ने इस उपलब्धि की सराहना की है और इस भाव का सम्मान किया है।

युवाओं के लिए प्रेरणा
यह घटना सिर्फ धार्मिक नहीं है, यह प्रेरणा है उन युवाओं के लिए जो अपने लक्ष्य को पाना चाहते हैं। जैसे सत्यदीप ने राम का नाम लेकर सबसे कठिन चढ़ाई पूरी की, वैसे ही जीवन की हर कठिनाई पार की जा सकती है। अब सबको इंतजार है उस दिन का जब राम मंदिर के संग्रहालय में यह 'एवरेस्ट वाला ध्वज' शान से प्रदर्शित किया जाएगा।