आज़ादी की मांग या मौत का बुलावा? मानवाधिकार संस्था का बड़ा खुलासा ईरान में हुआ था सड़कों पर कत्लेआम

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News India Live, Digital Desk : दुनिया के किसी भी कोने में जब लोग अपने हक के लिए सड़कों पर उतरते हैं, तो उनकी  आँखों में एक बेहतर भविष्य का सपना होता है। लेकिन ईरान में जो कुछ भी हुआ, उसकी जो रिपोर्ट अब सामने आई है, वह केवल दुखद नहीं बल्कि डराने वाली भी है। एक मानवाधिकार संगठन (Human Rights Group) ने दावा किया है कि विरोध प्रदर्शनों के दौरान ईरानी सरकार ने करीब 4,000 लोगों को मौत के घाट उतार दिया।

क्या इंसान की जान की कोई कीमत नहीं?
सोचिए, 4,000 कोई छोटा-मोटा नंबर नहीं होता। ये 4,000 वो लोग थे जिनके अपने परिवार थे, सपने थे और जो शायद बस इतना चाहते थे कि उनकी बात सुनी जाए। ईरान में 'महिला, जीवन और आज़ादी' जैसे नारों के साथ जब आवाज़ उठना शुरू हुई, तो शायद किसी ने नहीं सोचा था कि सरकार इसे कुचलने के लिए इस हद तक जा सकती है।

पर्दे के पीछे क्या छिपा रहा ईरान?
अक्सर ऐसी जगहों से खबरें बाहर आना बहुत मुश्किल होता है जहाँ इंटरनेट पर पाबंदी हो और मीडिया की ज़ुबान बंद कर दी गई हो। लेकिन मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की इस रिपोर्ट ने उस धुंध को साफ़ किया है। बताया जा रहा है कि इनमें से कई लोगों को सीधे गोली मारी गई, तो कई ने हिरासत में दम तोड़ दिया। सबसे ज़्यादा तकलीफ की बात यह है कि मारे गए लोगों में युवाओं और बच्चों की भी बड़ी तादाद थी।

सवाल सत्ता का है या सवेदना का?
जब हम ऐसी खबरें पढ़ते हैं, तो जेहन में एक ही सवाल आता है कि क्या किसी भी शासन या विचारधारा को बनाए रखने के लिए अपने ही देश के नागरिकों का खून बहाना सही है? अंतर्राष्ट्रीय जगत में भले ही इस पर चर्चा हो रही है, लेकिन ईरान के अंदर के लोग जिस डर और साए में जी रहे होंगे, उसका अंदाजा लगाना मुश्किल है।

इस खुलासे के बाद एक बार फिर पूरी दुनिया की नजरें ईरान पर टिक गई हैं। लोग मांग कर रहे हैं कि इसकी निष्पक्ष जाँच हो, ताकि उन हजारों परिवारों को इंसाफ मिल सके जिन्होंने बिना किसी जुर्म के अपनों को खो दिया। हकीकत तो ये है कि इतिहास कभी इन सड़कों पर बहे खून के निशान को नहीं भूल पाएगा।