अमेरिका और यूरोप में आर-पार की तैयारी? जानिए 100 खरब डॉलर का वो ट्रैप जिसमें फंस सकती है ट्रंप की रणनीतियां

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News India Live, Digital Desk: अंतरराष्ट्रीय राजनीति की दुनिया भी कभी-कभी किसी थ्रिलर फिल्म जैसी लगने लगती है। जहाँ एक तरफ पुराने दोस्तों के साथ दोस्ती निभाने की बातें होती हैं, वहीं दूसरी तरफ पीठ पीछे एक-दूसरे को 'सबक' सिखाने की तैयारी भी चलती रहती है। ताजा मामला यूरोप और अमेरिका के संबंधों के बीच का है, जो डोनाल्ड ट्रंप की वापसी की सुगबुगाहट के साथ ही गरमा गया है।

सबसे पहले बात करते हैं ग्रीनलैंड की। आपको याद होगा, ट्रंप ने अपने पिछले कार्यकाल में ग्रीनलैंड को खरीदने की इच्छा जाहिर की थी, जिसे दुनिया ने मजाक समझकर टाल दिया था। लेकिन अब खबरें आ रही हैं कि यह केवल एक रियल एस्टेट डील नहीं, बल्कि आर्कटिक क्षेत्र पर कब्जे की बड़ी रणनीति है।

यूरोप का 'मास्टर स्ट्रोक' क्या है?
यूरोप जानता है कि अगर ट्रंप दोबारा राष्ट्रपति बनते हैं और अपने 'अमेरिका फर्स्ट' वाले एजेंडे पर सख्ती से चलते हैं, तो इससे यूरोप की इकोनॉमी को चोट पहुँच सकती है। इसके जवाब में यूरोप अब 'आर्थिक हथियारों' का इस्तेमाल करने की सोच रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि यूरोप की अमेरिका में करीब 10 ट्रिलियन (यानी लगभग 100 खरब) डॉलर की संपत्तियाँ (Assets) मौजूद हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ट्रंप ट्रेड वॉर शुरू करते हैं, तो यूरोप इन संपत्तियों को 'वेपनाइज' (हथियार की तरह इस्तेमाल) कर सकता है। यानी, वो अमेरिका में लगे अपने पैसों को ऐसी जगह इस्तेमाल कर सकते हैं या ऐसे फैसले ले सकते हैं जिससे अमेरिकी मार्केट में खलबली मच जाए।

ग्रीनलैंड बीच में कहाँ से आया?
ग्रीनलैंड पर डेनमार्क का अधिकार है और यह यूरोप के लिए सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। अगर अमेरिका यहाँ अपना दबदबा बढ़ाता है, तो यूरोप इसे अपनी सुरक्षा और सीमाओं के लिए खतरे के तौर पर देखता है। 10 ट्रिलियन डॉलर के निवेश की यह लड़ाई असल में दुनिया के नक्शे पर कौन सबसे बड़ा शक्तिशाली होगा, इस होड़ का हिस्सा है।

आम जनता पर क्या होगा असर?
हम और आप शायद ये सोचें कि इन बड़े मुल्कों की लड़ाई से हमें क्या? लेकिन असल में जब अमेरिका और यूरोप जैसे दो बड़े आर्थिक धड़े आपस में टकराते हैं, तो उसका असर ग्लोबल मार्केट और महंगाई पर सीधा पड़ता है। यूरोप अब अपनी रक्षा और पैसे, दोनों के लिए अमेरिका पर से निर्भरता कम करने के मोड में है।

कुल मिलाकर, राजनीति और कूटनीति का यह खेल अब एक नए मोड़ पर पहुँच चुका है, जहाँ 'दोस्त' अब हाथ में एक बड़ी लाठी लेकर गले मिलने की तैयारी कर रहे हैं।