फर्जी वोट डालने वालों का खेला खत्म ,बिहार पंचायत चुनाव में इस बार कैमरे पकड़ेंगे भूतिया वोटर
News India Live, Digital Desk: बिहार में गाँव की राजनीति और पंचायत चुनाव का अपना ही रंग होता है। अक्सर गाँव की गपशप और चाय की टपरियों पर चर्चा इस बात की रहती है कि "फलने का वोट ढिमके ने डाल दिया" या "इतने लोग तो यहाँ रहते भी नहीं फिर भी वोट पड़ गया।" लेकिन लगता है कि बिहार सरकार और निर्वाचन आयोग ने अब इन 'फर्जी वोटरों' और 'धांधली' करने वालों की कमर तोड़ने का मन बना लिया है।
खबर आ रही है कि आने वाले बिहार पंचायत चुनाव (Bihar Panchayat Elections) को लेकर सरकार एक जबरदस्त तकनीक अपनाने जा रही है। अब वोटिंग के समय पोलिंग बूथों पर कैमरे लगाए जाएंगे जो न केवल भीड़ पर नजर रखेंगे, बल्कि फर्जी वोटरों की पहचान करने में भी मदद करेंगे।
कैसे पकड़ा जाएगा 'फर्जीवाड़ा'?
देखा जाए तो पुराने समय में कई बार एक ही शख्स कई बार वोट डाल आता था, या फिर उनके नाम पर वोट गिर जाता था जो गाँव में हैं ही नहीं। इस बार चुनाव में फेस रिकॉग्निशन तकनीक (Face Recognition Technology) और कैमरों का इस्तेमाल इस तरह से होगा कि अगर कोई दोबारा वोट डालने की कोशिश करेगा, तो सिस्टम तुरंत अलर्ट दे देगा।
मंत्री जी का कहना है कि सरकार चाहती है कि गाँव का विकास उसी इंसान के हाथ में हो जिसे लोगों ने ईमानदारी से चुना है। बूथ लूटने और जाली मतदान करने वाली खबरें अब गुजरे जमाने की बात हो जाएँगी। इन कैमरों के जरिए पोलिंग स्टेशंस पर होने वाली हर गतिविधि की निगरानी सीधे हेडक्वार्टर से की जा सकेगी।
गाँव वालों के लिए इसका क्या मतलब है?
आम आदमी के नजरिए से देखें तो यह एक राहत की बात है। कई बार दबंग लोग असली वोटरों को डराकर उनके हक का वोट ले जाते थे। कैमरे होने से लोगों में यह भरोसा जगेगा कि उनका वोट सुरक्षित है और कोई दूसरा उनके नाम का गलत फायदा नहीं उठा सकता।
हालाँकि, कुछ लोग इसे प्राइवेसी या गाँव में "तनाव" की दृष्टि से देख सकते हैं, लेकिन पारदर्शिता (Transparency) के लिए ये कदम बहुत जरूरी माना जा रहा है। सरकार का ये साफ़ संदेश है कि विकास की पहली सीढ़ी, यानी पंचायत चुनाव, पूरी तरह से पारदर्शी और साफ-सुथरे होने चाहिए।