जमीन का झमेला अब होगा हमेशा के लिए खत्म,नीतीश कुमार ने तय कर दी तारीख, बस 31 मार्च तक का है इंतज़ार

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News India Live, Digital Desk: अगर आप बिहार के रहने वाले हैं, तो आप जानते होंगे कि गाँव-जवार में सबसे बड़ा सरदर्द क्या है जमीन का विवाद! भाई-भाई में लड़ाई हो या पड़ोसी से तनातनी, आधी से ज्यादा मुश्किलें जमीन की पैमाइश और पुराने नक्शों की वजह से ही खड़ी होती हैं। लेकिन अब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस समस्या की जड़ पर प्रहार करने की तैयारी कर ली है।

हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कह दिया कि बिहार में चल रहा जमीन सर्वे (Land Survey in Bihar) का काम किसी भी हाल में 31 मार्च तक पूरा हो जाना चाहिए। अब इस घोषणा के बाद राज्य के प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज हो गई है।

बात सिर्फ नक्शा बनाने की नहीं है...
अक्सर लोग सोचते हैं कि ये केवल लाइनें खींचने का काम है, लेकिन सच ये है कि मुख्यमंत्री इसे राज्य में होने वाले अपराधों से जोड़कर देख रहे हैं। दरअसल, बिहार में होने वाली हिंसक घटनाओं में एक बड़ी तादाद उन झगड़ों की है जो जमीन के टुकड़ों से शुरू होते हैं। अगर सबका 'खाता' और 'खेसरा' डिजिटल हो गया और नक्शा (Digital Land Mapping) अपडेट हो गया, तो धोखाधड़ी की गुंजाइश खत्म हो जाएगी।

मुख्यमंत्री का संदेश बिल्कुल साफ है
नीतीश कुमार ने अधिकारियों को सख्त हिदायत दी है कि अब तारीखें आगे नहीं बढ़ेंगी। जो भी कमियां हैं या जहां भी काम अटका पड़ा है, उसे मिशन मोड में लेकर पूरा करें। मुख्यमंत्री का मानना है कि जैसे ही सर्वे और जमीन की मैपिंग का काम पूरा होगा, राज्य में भूमि विवाद की घटनाओं में 60% से 70% तक की गिरावट आएगी।

जनता को क्या करना चाहिए?
अल़्टीमेटम तो मिल गया है, लेकिन इसका फायदा तभी होगा जब जनता भी जागरूक रहे। अगर आपके पुरखों की जमीन है और अभी तक आपके पास पुख्ता कागजात या खतियान नहीं है, तो उसे अपडेट करवाने का यह सबसे सही समय है। मुख्यमंत्री की ये डेडलाइन न केवल अधिकारियों के लिए है, बल्कि उन लोगों के लिए भी एक संकेत है जो सालों से अपनी जमीन के मामले को कोर्ट-कचहरी में लटकाए बैठे हैं।

कुल मिलाकर, बिहार अब जमीन की उलझनों से निकलकर एक व्यवस्थित डिजिटल रिकॉर्ड की तरफ बढ़ने को बेताब है। 31 मार्च की ये तारीख बिहार की सामाजिक शांति के लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकती है।