BJP के नए कप्तान के नाम को लेकर सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस, जानिए क्या है सही स्पेलिंग और क्यों हो रहा है कन्फ्यूजन
News India Live, Digital Desk: बीजेपी को उनका नया राष्ट्रीय अध्यक्ष मिल गया है, और इसके साथ ही चर्चाओं का बाजार भी गर्म हो गया है। लेकिन दिलचस्प बात ये है कि जितनी चर्चा उनकी नई जिम्मेदारी को लेकर नहीं हो रही, उससे कहीं ज्यादा बहस उनके नाम की स्पेलिंग (Spelling) पर छिड़ गई है।
अक्सर आपने देखा होगा कि जब भी कोई बड़ा नाम सुर्खियों में आता है, तो लोग छोटी-छोटी बातों पर गौर करने लगते हैं। इस बार मामला थोड़ा अलग है। लोग गूगल पर सर्च कर रहे हैं कि भाई, असली नाम क्या है? क्या ये 'Naveen' है या फिर 'Nabin'?
आखिर ये कन्फ्यूजन शुरू कहाँ से हुआ?
दरअसल, भारतीय भाषाओं और उनके उच्चारण का अपना एक अलग ही स्वैग है। खास तौर पर अगर हम पूर्वी भारत या बंगाल-ओडिशा की तरफ रुख करें, तो वहाँ अक्सर 'व' (V) को 'ब' (B) के तौर पर बोला और लिखा जाता है। यही वजह है कि सरकारी दस्तावेजों से लेकर सोशल मीडिया पोस्ट्स तक, लोग अलग-अलग स्पेलिंग का इस्तेमाल कर रहे हैं।
किसी ने अपनी पोस्ट में उन्हें 'Naveen' लिखकर बधाई दी, तो किसी आधिकारिक लिस्ट में उनका नाम 'Nabin' लिखा नजर आया। अब आम जनता तो परेशान होगी ही कि आखिर किसे सही माना जाए।
नाम में क्या रखा है?
कहने को तो ये सिर्फ एक अक्षर का फेरबदल है, लेकिन जब बात देश की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी के मुखिया की हो, तो हर छोटी चीज मायने रखती है। जानकारों का कहना है कि ये पूरी तरह से क्षेत्रीय उच्चारण और लिखने के तरीके पर निर्भर करता है। हालांकि, आधिकारिक तौर पर पार्टी जो स्पेलिंग इस्तेमाल करती है, वही सबसे सटीक मानी जाती है।
बीजेपी जैसे बड़े संगठन में जब नए अध्यक्ष की घोषणा होती है, तो उनकी हर छोटी जानकारी जनता के लिए अहम हो जाती है। फिलहाल सोशल मीडिया पर तो 'V' और 'B' की ये जंग जारी है, लेकिन कार्यकर्ता और समर्थक बस इस बात से खुश हैं कि पार्टी को नया नेतृत्व मिल गया है।
तो सही क्या है?
अगर आप भी इस बात को लेकर उलझन में हैं, तो आपको बता दें कि हिंदी में 'नवीन' लिखना और पढ़ना सबसे ज्यादा चलन में है। वहीं अंग्रेजी में इसे लिखने के दो तरीके हो सकते हैं, जो व्यक्ति की अपनी पसंद या कागजी दस्तावेजों पर आधारित होते हैं। आने वाले दिनों में जब उनके नाम की नेमप्लेट और आधिकारिक लेटरहेड सामने आएंगे, तो यह तस्वीर और भी साफ हो जाएगी।
खैर, स्पेलिंग चाहे जो भी हो, असली काम तो उस जिम्मेदारी को निभाने का है जो उन्हें सौंपी गई है। देखना दिलचस्प होगा कि बीजेपी के ये नए 'सारथी' पार्टी को आने वाले चुनावों में किस ऊंचाई पर ले जाते हैं।