UP में लाखों वोटरों पर संकट! सरकार जो निवास प्रमाण पत्र दे रही, चुनाव आयोग ने उसे किया अमान्य, जानिए अब क्या होगा?

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बरेली/लखनऊ: उत्तर प्रदेश में लाखों मतदाताओं के सामने एक बड़ी मुसीबत खड़ी हो गई है। बरेली के आंवला क्षेत्र में एक महिला को चुनाव आयोग ने सिर्फ इसलिए नोटिस भेज दिया, क्योंकि मतदाता सूची के सत्यापन के दौरान वह 'सामान्य निवास प्रमाण पत्र' ही पेश कर सकीं। आयोग ने इसे मानने से इनकार कर दिया, क्योंकि उसे 'स्थायी निवास प्रमाण पत्र' चाहिए, जो अब प्रदेश में बनता ही नहीं है। यह मामला सिर्फ एक महिला का नहीं, बल्कि उस प्रशासनिक पेंच की बानगी है, जिसमें राज्य के लाखों वोटर फंस गए हैं। सरकार जो प्रमाण पत्र जारी कर रही है, चुनाव आयोग उसे अवैध मान रहा है, जिससे लोगों के सामने अपनी नागरिकता और पता साबित करने का संकट खड़ा हो गया है।

सरकारी उलझन में फंसा आम मतदाता
 

यह पूरा विवाद दो सरकारी विभागों के नियमों के टकराव से पैदा हुआ है। एक तरफ लेखपाल और तहसील प्रशासन का कहना है कि अब पूरे उत्तर प्रदेश में केवल 'सामान्य निवास प्रमाण पत्र' ही जारी किए जाते हैं। यही प्रमाण पत्र छात्रों की स्कॉलरशिप से लेकर पेंशन और अन्य सभी सरकारी योजनाओं के लिए मान्य है। वहीं, दूसरी ओर चुनाव आयोग अपनी मतदाता सूची के सत्यापन के लिए केवल 'स्थायी निवास प्रमाण पत्र' की मांग पर अड़ा है। जिला स्तर के अधिकारी भी हैरान हैं कि जब राज्य सरकार केवल एक ही तरह का निवास प्रमाण पत्र बना रही है, तो आयोग उसे कैसे खारिज कर सकता है। इस टकराव का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।

चुनाव आयोग ने क्यों खारिज किया 'सामान्य निवास प्रमाण पत्र'?
 

इस बड़े विवाद पर स्थिति साफ करते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने बताया कि 'सामान्य निवास प्रमाण पत्र' को क्यों स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा, "यह प्रमाण पत्र किसी भी व्यक्ति के 5-6 महीने कहीं रहने पर ही जारी किया जा सकता है। इससे व्यक्ति के स्थायी पते की पुष्टि नहीं होती।" चुनाव आयोग का मुख्य उद्देश्य मतदाता की स्थायी पहचान और नागरिकता का सत्यापन करना है, ताकि मतदाता सूची में कोई गड़बड़ी न हो। चूंकि सामान्य निवास प्रमाण पत्र इस शर्त को पूरा नहीं करता, इसलिए इसे मैपिंग प्रक्रिया में आधार नहीं माना जा सकता।

तो अब इन 13 दस्तावेजों से साबित करें अपनी पहचान
 

जिन लोगों को मतदाता सूची के सत्यापन के दौरान नोटिस मिला है, उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है। चुनाव आयोग ने पहचान और पते के सत्यापन के लिए 13 तरह के दस्तावेजों को मान्यता दी है। अगर आपके पास निवास प्रमाण पत्र को लेकर कोई समस्या है, तो आप इनमें से कोई भी एक दस्तावेज पेश कर सकते हैं:

  1. पासपोर्ट: भारत सरकार द्वारा जारी वैध पासपोर्ट।
  2. जन्म प्रमाण पत्र: सक्षम अधिकारी द्वारा जारी किया गया बर्थ सर्टिफिकेट।
  3. सरकारी आईडी कार्ड: केंद्र या राज्य सरकार के कर्मचारियों का पहचान पत्र या पेंशन भुगतान आदेश (PPO)।
  4. शैक्षणिक प्रमाण पत्र: किसी भी मान्यता प्राप्त बोर्ड या विश्वविद्यालय की 10वीं की मार्कशीट।
  5. स्थायी निवास प्रमाण पत्र: (यदि किसी के पास पुराना बना हुआ है)।
  6. जाति प्रमाण पत्र: सक्षम अधिकारी द्वारा जारी SC, ST या OBC प्रमाण पत्र।
  7. आधार कार्ड: आयोग द्वारा जारी विशेष निर्देशों के अनुसार मान्य।
  8. जमीन या मकान के कागज: सरकार द्वारा जारी भूमि या मकान का आवंटन पत्र।
  9. परिवार रजिस्टर: राज्य सरकार या स्थानीय निकायों द्वारा जारी आधिकारिक परिवार रजिस्टर की कॉपी।
  10. पुराने सरकारी रिकॉर्ड: 1 जुलाई 1987 से पहले बैंक, डाकघर या LIC द्वारा जारी कोई भी पहचान पत्र।
  11. वन अधिकार पत्र: वन क्षेत्र में रहने वाले आदिवासियों के लिए जारी अधिकार पत्र।
  12. NRC का रिकॉर्ड: राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर की प्रति (जहां लागू हो)।
  13. बिहार SIR अंश: बिहार के मतदाताओं के लिए विशेष मतदाता सूची का हिस्सा।