Indian Army : वो कौन-सी एक घटना थी जिसने जनरल उपेंद्र द्विवेदी की पूरी सोच बदल दी? जानिए नए आर्मी चीफ़ का सबसे भावुक क़िस्सा

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News India Live, Digital Desk: एक फ़ौजी की ज़िंदगी सिर्फ़ बंदूक़, बारूद और सरहदों की कहानी नहीं होती। ये जज़्बातों, जीत और कभी न भूलने वाले सबक की कहानी भी होती है। हमारे नए सेना प्रमुख, जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने हाल ही में एक ऐसा ही क़िस्सा साझा किया, जो बताता है कि एक असली सिपाही का दिल कैसा होता है और उसकी असली जीत क्या होती है।

ये बात आज से क़रीब 24 साल पुरानी है। तब उपेंद्र द्विवेदी एक जोशीले नौजवान मेजर हुआ करते थे। उन्होंने अभी-अभी एक बेहद मुश्किल ऑपरेशन में कुछ ख़तरनाक आतंकवादियों को ढेर किया था। ज़ाहिर है, वो और उनकी टीम गर्व और ख़ुशी से भरे हुए थे। उन्हें लग रहा था कि उन्होंने एक बड़ी कामयाबी हासिल की है।

वो इसी जीत के एहसास में डूबे थे कि उनके सीनियर, लेफ्टिनेंट जनरल एस. पद्मनाभन का फ़ोन आया। मेजर द्विवेदी को लगा कि फ़ोन शाबाशी के लिए आया होगा। लेकिन फ़ोन के दूसरी तरफ़ से जो आवाज़ आई, उसने उनके पैरों तले ज़मीन खिसका दी।

वो फ़ोन कॉल जिसने सब कुछ बदल दिया

सीनियर ने काँपती हुई आवाज़ में बताया, "बधाई हो, लेकिन एक बुरी ख़बर है। पहलगाम में आतंकवादियों ने अमरनाथ यात्रा पर जा रहे 30 से ज़्यादा निर्दोष तीर्थयात्रियों को बेरहमी से मार डाला है।"

जनरल द्विवेदी बताते हैं कि ये सुनकर उन्हें ऐसा लगा जैसे किसी ने उनके सीने पर एक भारी पत्थर रख दिया हो। एक पल में उनकी सारी ख़ुशी, सारा गर्व, एक गहरे दुख और ज़िम्मेदारी के अहसास में बदल गया। उन्हें उस दिन पहली बार समझ आया कि एक फ़ौजी का काम सिर्फ़ दुश्मनों को मारना नहीं होता। उनकी असली और सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी तो अपने देश के आम नागरिकों की, अपनी 'अवाम' की हिफ़ाज़त करना है।

ज़िंदगी का सबसे बड़ा सबक

उस एक फ़ोन कॉल ने मेजर द्विवेदी को वो सबक सिखाया जो उन्हें कोई भी किताब या ट्रेनिंग नहीं सिखा सकती थी। उन्हें एहसास हुआ कि सौ आतंकवादियों को मारने की जीत भी एक निर्दोष नागरिक की जान बचाने के सामने छोटी है। यही सोच उनके पूरे करियर का मूलमंत्र बन गई।

आज जब जनरल उपेंद्र द्विवेदी भारतीय सेना के सर्वोच्च पद पर हैं, तो उनका ये क़िस्सा हमें सिर्फ़ भावुक नहीं करता, बल्कि एक भरोसा भी दिलाता है। ये भरोसा कि हमारी सेना की कमान एक ऐसे जनरल के हाथ में है, जो सिर्फ़ जंग की रणनीति नहीं, बल्कि हर एक भारतीय की ज़िंदगी की क़ीमत भी समझता है।