फार्मेसी की दुनिया में बड़ा क्लीन स्वीप, झारखंड में 2500 फार्मासिस्टों के रजिस्ट्रेशन होंगे रद्द, जानें क्या है पूरी वजह
News India Live, Digital Desk: हम जब भी बीमार होते हैं, तो डॉक्टर की पर्ची लेकर सीधा दवा की दुकान पर पहुँच जाते हैं। वहां खड़े व्यक्ति पर हमें पूरा भरोसा होता है कि वह जो दवा हमें दे रहा है, वह बिल्कुल सही होगी। लेकिन सोचिए, अगर उस दुकान के पीछे खड़ा फार्मासिस्ट ही नियमों के खेल में फंसा हो? झारखंड में इसी व्यवस्था को सुधारने के लिए प्रशासन ने एक बहुत ही बड़ा और सख्त कदम उठाने की तैयारी कर ली है।
खबर है कि झारखंड स्टेट फार्मेसी काउंसिल राज्य के लगभग 2500 फार्मासिस्टों के रजिस्ट्रेशन को रद्द करने की दिशा में काम कर रही है। ये कोई छोटा आंकड़ा नहीं है। दरअसल, इसके पीछे कई बड़े कारण सामने आए हैं। कुछ लोग ऐसे हैं जिन्होंने सालों से अपना रजिस्ट्रेशन रिन्यू (Renew) ही नहीं करवाया, वहीं कुछ मामले ऐसे हैं जहाँ लोग दूसरी जगह नौकरी कर रहे हैं और उनका लाइसेंस किसी और दुकान पर इस्तेमाल हो रहा है।
अक्सर आपने सुना होगा कि "डिग्री किराये पर" लेकर दुकान खोली गई है। काउंसिल ने अब ऐसे 'नामधारी' फार्मासिस्टों पर नकेल कसने की ठानी है। इस कदम का मुख्य मकसद यह है कि जो वाकई योग्य हैं और मेहनत से काम कर रहे हैं, उन्हीं की पहचान बनी रहे। गलत तरीके से कागजों का हेरफेर करने वालों की वजह से पूरी व्यवस्था पर सवाल उठने लगते हैं और लोगों की सेहत के साथ भी खिलवाड़ होने का अंदेशा रहता है।
प्रशासन की इस कड़ाई से उन ईमानदार फार्मासिस्टों में ख़ुशी है जो चाहते थे कि ये सिस्टम साफ़-सुथरा हो। झारखंड फार्मेसी काउंसिल का यह फैसला उन लोगों के लिए एक कड़ा सबक है जो समझते हैं कि एक बार सर्टिफिकेट ले लिया तो नियमों का पालन करना ज़रूरी नहीं है। आने वाले कुछ ही हफ़्तों में काउंसिल आधिकारिक तौर पर इन नामों को लिस्ट से हटा सकती है।
क्या आपको लगता है कि इस तरह की जांच देश के हर राज्य में होनी चाहिए? क्योंकि दवा का मामला सीधा जान से जुड़ा है। अपनी राय हमारे साथ जरूर शेयर करें।