Yoga for Hip Mobility 2026: कूल्हों की जकड़न खोलेंगे ये 8 आसान योगासन, चलने-फिरने में मिलेगी जादुई राहत

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लखनऊ। क्या आपको सुबह सोकर उठने के बाद या घंटों ऑफिस की कुर्सी पर बैठने के बाद चलने में भारीपन महसूस होता है? यदि हाँ, तो आपके कूल्हे (Hips) अपनी स्वाभाविक गतिशीलता खो रहे हैं। कूल्हों में अकड़न न केवल आपके चलने के तरीके को बिगाड़ती है, बल्कि यह पीठ के निचले हिस्से और घुटनों में पुराने दर्द का मुख्य कारण बनती है। 2026 की इस भागदौड़ भरी लाइफस्टाइल में, जहाँ फिजिकल एक्टिविटी कम हो गई है, योग के ये सौम्य आसन आपकी 'प्रगति की बाधा' को दूर कर शरीर में नया लचीलापन भर सकते हैं।

कूल्हों की जकड़न क्यों बन रही है समस्या?

लंबे समय तक एक ही मुद्रा में बैठने या तनाव के कारण हमारे हिप जॉइंट्स के आस-पास की मांसपेशियां सिकुड़ जाती हैं। जब कूल्हे ठीक से काम नहीं करते, तो शरीर इसका भार पीठ और घुटनों पर डाल देता है, जिससे असंतुलन पैदा होता है। योग का उद्देश्य इन मांसपेशियों को 'सुरक्षित रूप से शिथिल' (Safe Relaxation) करना है, न कि उन पर अतिरिक्त दबाव डालना।

गतिशीलता बढ़ाने वाले 8 प्रभावी योगासन

अपानासन (Knee to Chest): पीठ के बल लेटकर घुटनों को छाती तक लाना रीढ़ के निचले हिस्से को तुरंत आराम देता है और बैठने से जमा तनाव को दूर करता है।

सुपाइन फिगर-फोर पोज़: यह कूल्हों के बाहरी हिस्से और नितंबों की मांसपेशियों को बिना किसी तनाव के खोलता है। इसमें आपकी पीठ जमीन पर टिकी रहती है, जो इसे सुरक्षित बनाता है।

सुप्त बद्ध कोणासन (Reclined Butterfly): लेटी हुई तितली मुद्रा कूल्हे के भीतरी हिस्से की पुरानी अकड़न के लिए रामबाण है। इसमें गुरुत्वाकर्षण बल आपके लिए काम करता है।

वाइड-नी चाइल्ड पोज़ (Balasana): घुटनों को चौड़ा करके किया जाने वाला यह आसन मन को शांत करता है और कूल्हों को धीरे-धीरे फैलाता है।

मार्जरीआसन (Cat-Cow Pose): यह कूल्हों और रीढ़ के बीच तालमेल बैठाता है। यह कोमल गति रक्त संचार बढ़ाकर जोड़ों को चिकनाई प्रदान करती है।

लो लंज (Low Lunge): यह 'हिप फ्लेक्सर्स' के खिंचाव को बहाल करता है, जिससे चलने और खड़े होने में सहजता महसूस होती है।

हैप्पी बेबी पोज़ (Happy Baby): यह शरीर के गहरे तनाव को सुरक्षित रूप से बाहर निकालता है। इसमें जोर लगाने के बजाय अपनी सांसों पर ध्यान दें।

बैठी हुई तितली मुद्रा (Seated Butterfly): सीधे बैठकर इसे करने से पेल्विक एरिया की गतिशीलता में धीरे-धीरे सुधार होता है।

अभ्यास का सही तरीका और सुझाव

अवधि: प्रत्येक आसन को 45 से 90 सेकंड तक रोकें। नाक से धीमी और गहरी सांस लें।

निरंतरता: सप्ताह में 4-6 दिन मात्र 10-15 मिनट का समय निकालें।

सांस का जादू: सांस अंदर लेने की तुलना में सांस छोड़ने (Exhale) का समय लंबा रखें। लंबी सांस छोड़ना मांसपेशियों को जल्दी आराम करने का संकेत देता है।

क्या न करें: कभी भी जबरदस्ती गहराई तक जाने की कोशिश न करें और न ही झटके दें। गतिशीलता तीव्रता से नहीं, बल्कि निरंतरता और धैर्य से आती है।