Women's Health After 40: 40 की उम्र पार कर चुकी महिलाएं सावधान! ये 3 टेस्ट कराना है बेहद जरूरी, लापरवाही बन सकती है कैंसर का कारण

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हेल्थ डेस्क, नई दिल्ली। आधुनिक जीवन की भागदौड़ में महिलाएं अक्सर अपने परिवार की सेहत का तो ख्याल रखती हैं, लेकिन खुद की बारी आने पर 'कल देखेंगे' कहकर टाल देती हैं। डॉक्टरों के अनुसार, 40 वर्ष की आयु के बाद महिलाओं के शरीर में हार्मोनल बदलाव और इम्यूनिटी में कमी आने लगती है। इस उम्र में कई बीमारियां, विशेष रूप से कैंसर, बिना किसी लक्षण के शरीर में घर करने लगती हैं।

एक्शन कैंसर हॉस्पिटल की ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. सारिका गुप्ता के अनुसार, "कैंसर से बचाव का एकमात्र सबसे बड़ा हथियार स्क्रीनिंग (समय पर जांच) है।" शुरुआती चरण में पकड़ी गई बीमारी का इलाज न केवल आसान होता है, बल्कि पूरी तरह सफल भी हो सकता है।

1. ब्रेस्ट कैंसर: मैमोग्राफी है सुरक्षा कवच

महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के मामले सबसे ज्यादा देखे जा रहे हैं। 40 की उम्र के बाद इसकी आशंका कई गुना बढ़ जाती है।

जरूरी टेस्ट: साल में एक बार मैमोग्राफी (Mammography) जरूर कराएं। यह टेस्ट गांठ बनने से बहुत पहले ही ऊतकों (Tissues) में होने वाले सूक्ष्म बदलावों को पकड़ लेता है।

खुद की जांच: महीने में एक बार 'सेल्फ ब्रेस्ट एग्जामिनेशन' करें। यदि कोई गांठ, दर्द या त्वचा के रंग में बदलाव दिखे, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें।

2. सर्वाइकल कैंसर: पैप स्मीयर और HPV टेस्ट

सर्वाइकल कैंसर की सबसे अच्छी बात यह है कि इसे कैंसर बनने से पहले ही रोका जा सकता है।

जरूरी टेस्ट: हर 3 से 5 साल में पैप स्मीयर (Pap Smear) और HPV टेस्ट कराएं। ये जांचें गर्भाशय ग्रीवा (Cervix) में होने वाले शुरुआती असामान्य बदलावों की पहचान कर लेती हैं। समय पर इलाज से इसे कैंसर में बदलने से रोका जा सकता है।

3. कोलोरेक्टल कैंसर: आंतों की सेहत पर नजर

40 के बाद आंत के कैंसर का खतरा भी बढ़ने लगता है। चूंकि इसके शुरुआती लक्षण जैसे पाचन में बदलाव या पेट दर्द अक्सर सामान्य लगते हैं, इसलिए इसकी जांच जरूरी है।

जरूरी टेस्ट: डॉक्टर की सलाह पर कोलोनोस्कोपी (Colonoscopy) या स्टूल टेस्ट कराएं। यह आंतों के भीतर विकसित होने वाले 'पॉलीप्स' को पहचान लेता है, जो भविष्य में कैंसर बन सकते हैं।

कैंसर के अलावा ये जांचें भी हैं अनिवार्य

कैंसर स्क्रीनिंग के साथ-साथ महिलाओं को इन स्वास्थ्य मानकों पर भी नजर रखनी चाहिए:

बोन डेंसिटी टेस्ट (DEXA Scan): ऑस्टियोपोरोसिस (हड्डियों का कमजोर होना) 40 के बाद तेजी से बढ़ता है।

लिपिड प्रोफाइल और शुगर: दिल की बीमारियों और डायबिटीज का समय पर पता लगाने के लिए कोलेस्ट्रॉल और ब्लड शुगर की जांच नियमित अंतराल पर कराएं।

ब्लड प्रेशर: बढ़ता बीपी केवल दिल ही नहीं, बल्कि किडनी की सेहत को भी प्रभावित करता है।

बचाव के लिए 4 मूल मंत्र (Doctor's Advice)

डॉक्टरों का कहना है कि जांच के साथ-साथ जीवनशैली में ये बदलाव कैंसर के खतरे को कम कर सकते हैं:

संतुलित आहार: डाइट में हरी सब्जियां, फल और फाइबर की मात्रा बढ़ाएं।

नियमित व्यायाम: दिन में कम कम 30 मिनट की वॉक या योग शरीर को सक्रिय रखता है।

वजन नियंत्रण: मोटापा कई तरह के कैंसर और हार्मोनल असंतुलन की जड़ है।

नशे से दूरी: तंबाकू और शराब का सेवन कैंसर के जोखिम को 10 गुना तक बढ़ा देता है।

40 के बाद आपकी सेहत केवल आपकी नहीं, बल्कि आपके पूरे परिवार की खुशहाली की बुनियाद है। इसलिए, लक्षणों का इंतजार न करें, आज ही अपनी स्क्रीनिंग शिड्यूल करें।