बिहार की राजनीति का सबसे बड़ा निमंत्रण, तेज प्रताप यादव ने सम्राट चौधरी और सीएम नीतीश को क्यों बुलाया?
News India Live, Digital Desk: बिहार के मौसम में भले ही कड़ाके की ठंड है, लेकिन राजधानी पटना का राजनीतिक तापमान अभी से बढ़ने लगा है। वजह है मकर संक्रांति के अवसर पर तेज प्रताप यादव द्वारा दी जाने वाली दही-चूड़ा की दावत। तेज प्रताप अक्सर अपनी अनूठी शैली के लिए जाने जाते हैं और इस बार उन्होंने एक ऐसा कदम उठाया है जिसे 'बड़ा दिल' दिखाना कहें या 'सियासी बिसात', लोग अपने-अपने हिसाब से मतलब निकाल रहे हैं।
भाई के साथ-साथ विरोधियों को भी याद किया
तेज प्रताप ने साफ कर दिया है कि वह अपने छोटे भाई और बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव को तो विशेष तौर पर बुला ही रहे हैं, लेकिन उनकी मेहमानों की लिस्ट में जो सबसे चौंकाने वाले नाम हैं, वो हैं— मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और बीजेपी के फायरब्रांड नेता सम्राट चौधरी। जी हां, जिस सरकार को घेरने में तेजस्वी और लालू जी दिन-रात लगे रहते हैं, उन्हीं के नेताओं को तेज प्रताप ने दही और गुड़ की मिठास के लिए आमंत्रित किया है।
क्या है इस 'भोज' के मायने?
राजनीति को समझने वाले लोग जानते हैं कि बिहार में दही-चूड़ा की प्लेट पर कई बार सरकारें बदल जाती हैं। तेज प्रताप यादव ने मीडिया से बात करते हुए बड़े सहज भाव से कहा कि "यह रिश्तों का त्योहार है, यहाँ राजनीति बीच में नहीं आनी चाहिए।" हालांकि, राजनीतिक गलियारों में चर्चा इस बात की है कि क्या नीतीश कुमार और आरजेडी के बीच जमी 'बर्फ' इस दही-चूड़ा के भोज में पिघलेगी? और सम्राट चौधरी, जो हमेशा हमलावर रहते हैं, क्या वह लालू परिवार के यहाँ भोज में शरीक होकर नया संदेश देंगे?
रिश्तों की अपनी ही कहानी
तेज प्रताप यादव का अपने भाई तेजस्वी के साथ एक अलग ही लगाव है। चाहे राजनीतिक मंच पर जो भी दिखे, लेकिन 'बड़े भाई' की भूमिका में तेज प्रताप हमेशा अपनी जगह बनाए रखते हैं। उन्होंने साफ़ कहा कि भाई को तो घर का भोज है ही, लेकिन वे चाहते हैं कि बिहार के सभी दिग्गज नेता एक साथ बैठकर खुशियाँ बाँटें।
सबकी नजरें अब संक्रांति पर
अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि संक्रांति के दिन तेज प्रताप के घर कौन-कौन से दिग्गज नेता पहुँचते हैं। क्या फिर से वह पुरानी 'लव-कुश' (नीतीश-तेजस्वी) वाली केमिस्ट्री दिखेगी या यह सिर्फ एक रस्म बनकर रह जाएगी? एक बात तो तय है, मकर संक्रांति पर तिलकुट से ज्यादा चर्चा बिहार के इस दावत की होने वाली है।
आपको क्या लगता है? क्या वाकई ये दावत सिर्फ भाईचारे के लिए है या इसके पीछे 2026 की कोई बड़ी प्लानिंग छुपी है? कमेंट में हमें अपनी राय जरूर दें।