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April 14 2026 08:12 am

सदन में शुक्रिया पर क्यों भड़के ओम बिरला? सांसद को बीच में ही टोका, स्पीकर की नसीहत ने मचाई हलचल

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News India Live, Digital Desk : लोकसभा की गरिमा और नियमों को लेकर सख्त रहने वाले स्पीकर ओम बिरला एक बार फिर अपने तेवर के कारण चर्चा में हैं। संसद के वर्तमान सत्र के दौरान एक सांसद द्वारा अपनी बात रखने के तरीके और बार-बार 'धन्यवाद' ज्ञापित करने की शैली पर स्पीकर ने गहरी नाराजगी व्यक्त की है। ओम बिरला ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सदन का समय कीमती है और सांसदों को अपनी बात सीधे मुद्दे पर रखनी चाहिए, न कि प्रशंसा और धन्यवाद के औपचारिक जाल में फंसना चाहिए। यह पहला मौका नहीं है जब बिरला ने माननीय सदस्यों को संसदीय मर्यादा और समय की महत्ता का पाठ पढ़ाया हो।

सांसद की 'थैंक यू' पॉलिटिक्स पर स्पीकर की दो टूक

मामला तब शुरू हुआ जब एक सांसद अपनी बात शुरू करने से पहले कई मिनटों तक आभार व्यक्त करते रहे। इस पर हस्तक्षेप करते हुए ओम बिरला ने उन्हें बीच में ही रोक दिया। स्पीकर ने कहा, "यह सदन चर्चा के लिए है, केवल धन्यवाद देने के लिए नहीं। आपको जो समय मिला है, उसका उपयोग जनता की समस्याओं को उठाने में करें।" बिरला की इस टिप्पणी के बाद सदन में सन्नाटा पसर गया। उन्होंने जोर देकर कहा कि सांसदों को अपनी भूमिका के प्रति गंभीर होना चाहिए और सदन की कार्यवाही को औपचारिक शिष्टाचार की भेंट नहीं चढ़ाना चाहिए।

पहले भी दिखा चुके हैं 'अनुशासन' का चाबुक

ओम बिरला अपनी कार्यशैली में अनुशासन के लिए जाने जाते हैं। पिछले सत्रों में भी उन्होंने उन सांसदों को फटकार लगाई थी जो सदन के भीतर बिना अनुमति के बोलते हैं या तख्तियां लहराते हैं। स्पीकर का मानना है कि संसद देश की सर्वोच्च पंचायत है और यहाँ होने वाली हर चर्चा का सीधा असर देश के करोड़ों नागरिकों पर पड़ता है। उन्होंने सांसदों को सुझाव दिया कि वे अपने भाषण को संक्षिप्त, तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ा हुआ रखें।

सोशल मीडिया पर वायरल हुई स्पीकर की नसीहत

ओम बिरला की इस नसीहत का वीडियो देखते ही देखते वायरल हो गया है। डिजिटल मंचों पर लोग स्पीकर के इस सख्त रुख की सराहना कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सदन की उत्पादकता (Productivity) बढ़ाने के लिए इस तरह का अनुशासन अनिवार्य है। अक्सर देखा जाता है कि राजनीतिक भाषणों और प्रशंसा में सदन का काफी समय बर्बाद हो जाता है, जिसे रोकने के लिए ओम बिरला ने एक नई और सख्त परिपाटी शुरू की है।