सेना की ताकत में जबरदस्त इजाफा: 2.38 लाख करोड़ के रक्षा सौदों को मिली मंजूरी, रूस से आएंगे 5 और S-400 मिसाइल सिस्टम
भारतीय सेना को आधुनिक और अजेय बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) ने शुक्रवार को 2.38 लाख करोड़ रुपये के विशाल रक्षा खरीद प्रस्तावों को अपनी स्वीकृति (AoN) दे दी है। इस मेगा डील का सबसे बड़ा आकर्षण रूस के साथ होने वाला S-400 मिसाइल सिस्टम का नया सौदा है, जो भारत की हवाई सुरक्षा (Air Defense) को अभेद्य दीवार में बदल देगा।
S-400 मिसाइल सिस्टम: आसमान का नया पहरेदार
भारत सरकार ने रूस से पांच और S-400 लंबी दूरी की सरफेस-टू-एयर मिसाइल सिस्टम खरीदने के प्रस्ताव को हरी झंडी दिखा दी है।
इतिहास: 2018 में भारत ने 5.43 अरब डॉलर में 5 स्क्वाड्रन का सौदा किया था, जिनमें से 3 मिल चुके हैं और पाकिस्तान सीमा पर तैनात हैं।
महत्ता: S-400 दुश्मन के विमानों, ड्रोन्स और मिसाइलों को लंबी दूरी से ही नष्ट करने में सक्षम है। 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान इसने अपनी मारक क्षमता का लोहा मनवाया था। इस साल के अंत तक पिछले सौदे के बाकी 2 स्क्वाड्रन भी भारत पहुँचने की उम्मीद है।
वायुसेना को मिलेंगे 'रिमोट स्ट्राइक एयरक्राफ्ट' और नए विमान
DAC ने भारतीय वायुसेना (IAF) की रणनीतिक क्षमता बढ़ाने के लिए कई अहम फैसले लिए हैं:
मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट: ये नए विमान पुराने हो चुके An-32 और Il-76 की जगह लेंगे, जिससे सेना की एयरलिफ्ट क्षमता मजबूत होगी।
मानवरहित स्ट्राइक एयरक्राफ्ट: डीआरडीओ (DRDO) के इस प्रोजेक्ट के तहत रिमोट से चलने वाले घातक स्ट्राइक एयरक्राफ्ट विकसित किए जाएंगे। ये बिना पायलट के दुश्मन के ठिकानों पर सटीक हमला करने और निगरानी (Surveillance) करने में सक्षम होंगे।
Su-30 एयरो इंजन: सुखोई विमानों के इंजन की मरम्मत और ओवरहॉलिंग को भी मंजूरी दी गई है, जिससे इन लड़ाकू विमानों की सर्विस लाइफ बढ़ जाएगी।
थल सेना और तटरक्षक बल के लिए आधुनिक हथियार
मैदानी जंग में भारत की पकड़ मजबूत करने के लिए कई घातक हथियारों की खरीद को मंजूरी दी गई है:
धनुष गन सिस्टम: यह आर्टिलरी गन लंबी दूरी तक सटीक निशाना लगाने में माहिर है और हर तरह के दुर्गम इलाकों में काम कर सकती है।
आर्मर्ड पियर्सिंग गोला-बारूद: बख्तरबंद दुश्मन टैंकों को भेदने के लिए विशेष एंटी-टैंक गोला-बारूद खरीदा जाएगा।
तटरक्षक बल (Coast Guard): समुद्री सीमाओं की सुरक्षा और बचाव कार्यों के लिए भारी-भरकम 'एयर कुशन वाहनों' (Hovercrafts) की खरीद को मंजूरी मिली है।
'आत्मनिर्भर भारत' और रूस के साथ रणनीतिक साझेदारी
सरकार ने रक्षा क्षेत्र में विदेशी निर्भरता कम करने के लिए 'मेक-इन-इंडिया' पर विशेष जोर दिया है:
P8I विमानों का रखरखाव: नौसेना के P8I समुद्री टोही विमानों की मरम्मत अब भारत में ही बोइंग इंडिया द्वारा की जाएगी, जिस पर 413 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
तुंगुस्का सिस्टम: रूसी कंपनी के साथ 445 करोड़ रुपये का अनुबंध कर तुंगुस्का एयर डिफेंस मिसाइल प्रणालियों की खरीद सुनिश्चित की गई है।
DAC की रिकॉर्ड उपलब्धि
वित्त वर्ष 2025-26 रक्षा खरीद के लिहाज से ऐतिहासिक रहा है। DAC ने अब तक 6.73 लाख करोड़ रुपये के कुल 55 प्रस्तावों को मंजूरी दी है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार,AoN (आवश्यकता की स्वीकृति) और हस्ताक्षरित अनुबंधों की संख्या इस साल किसी भी पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले सबसे ज्यादा रही है।