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March 29 2026 02:10 am

असम में 4 मई के बाद बदल जाएगी हवा? बदरुद्दीन अजमल के मियां वाले बयान से मचा सियासी कोहराम

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News India Live, Digital Desk: असम की राजनीति में एक बार फिर 'मियां' कार्ड ने तूफान खड़ा कर दिया है। ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) के प्रमुख बदरुद्दीन अजमल के एक हालिया बयान ने राज्य के सियासी गलियारों में खलबली मचा दी है। अजमल ने दावा किया है कि 4 मई के बाद असम में 'मियां' समुदाय का प्रभाव तेजी से बढ़ेगा। उनके इस बयान के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। चुनावी माहौल के बीच अजमल के इस दावे को ध्रुवीकरण की बड़ी कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

'4 मई के बाद हमारा वक्त आएगा'  अजमल का वो बयान जिसने बढ़ाई टेंशन

बदरुद्दीन अजमल अक्सर अपने बयानों के लिए चर्चा में रहते हैं, लेकिन इस बार उन्होंने एक खास तारीख का जिक्र कर सबको चौंका दिया है। एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने साफ कहा कि आने वाले समय में राज्य की व्यवस्था और राजनीति में 'मियां' समुदाय की भूमिका निर्णायक होगी। उन्होंने समर्थकों से एकजुट होने की अपील करते हुए संकेत दिया कि 4 मई के बाद समीकरण पूरी तरह बदल जाएंगे। अजमल के इस आत्मविश्वास ने बीजेपी और अन्य दलों को हमलावर होने का मौका दे दिया है।

असम की डेमोग्राफी और 'मियां' प्रभाव: क्यों डरी हुई है जनता?

असम में 'मियां' समुदाय (प्रवासी मुस्लिम) का मुद्दा हमेशा से संवेदनशील रहा है। अजमल का यह कहना कि उनका प्रभाव बढ़ेगा, उन लोगों के बीच चिंता पैदा कर रहा है जो स्वदेशी असमिया संस्कृति के संरक्षण की बात करते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अजमल अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने के लिए इस तरह की बयानबाजी कर रहे हैं। गौरतलब है कि एनआरसी (NRC) और परिसीमन के बाद असम की कई सीटों पर समीकरण बदले हैं, ऐसे में अजमल का यह बयान वोट बैंक को साधने की एक सोची-समझी रणनीति मानी जा रही है।

बीजेपी का पलटवार: 'असम को मियालैंड नहीं बनने देंगे'

अजमल के इस बयान पर मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के खेमे से भी तीखी प्रतिक्रिया आई है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि अजमल चाहे जितनी कोशिश कर लें, असम अपनी पहचान और संस्कृति से समझौता नहीं करेगा। सत्ता पक्ष ने इसे सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश करार दिया है। वहीं, कांग्रेस ने भी अजमल के बयान से दूरी बनाते हुए इसे बीजेपी की मदद करने वाला कदम बताया है। अब देखना यह होगा कि 4 मई के बाद अजमल की ये भविष्यवाणी कितनी सच साबित होती है या यह महज एक चुनावी शिगूफा बनकर रह जाएगा।