जिसे आप सुंदर लाइटिंग समझते हैं, वही आपको माइग्रेन दे रही है जानिए क्या कहती है साइंस

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News India Live, Digital Desk: माइग्रेन के शिकार लोग अक्सर बताते हैं कि दर्द उठते ही उनका मन करता है कि वे सब कुछ बंद करके एक अंधेरे कमरे में लेट जाएं। इसे मेडिकल की भाषा में 'फोटोफोबिया' कहते हैं। लेकिन समस्या तब बढ़ जाती है जब हमारे अपने घर की लाइटें ही इस दर्द को बढ़ाना या शुरू करना (ट्रिगर) कर देती हैं।

ये चमकदार रोशनी आपको बीमार क्यों कर रही है?
आजकल हम सबने घर में एलईडी (LED) और चमकदार लाइटें लगवा रखी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि माइग्रेन के मरीजों के लिए नीली रोशनी (Blue Light) सबसे खतरनाक होती है। इसके अलावा, कई बार कुछ लाइट्स बहुत हल्की 'फ्लिकरिंग' (Flickering) करती हैं, जो हमें आँखों से तो नहीं दिखती लेकिन हमारे दिमाग को लगातार डिस्टर्ब करती रहती हैं।

कौन-कौन सी गलतियां हम कर रहे हैं?

  • एक ही बल्ब पर निर्भरता: पूरे कमरे में सिर्फ एक बहुत चमकदार लाइट जलाना।
  • बहुत तेज़ सफ़ेद लाइट: नीली और तेज़ सफ़ेद रोशनी दिमाग की नसों को थका देती है।
  • खराब टीवी और मोबाइल की लाइट: कमरे में अंधेरा रखकर सिर्फ स्क्रीन देखना भी आँखों पर बुरा दबाव डालता है।

इसे कैसे सुधारें? (सरल हेल्थ टिप्स)

  1. वार्म लाइट्स (Warm Lights) अपनाएं: घर में तेज़ सफ़ेद लाइट के बजाय हलकी पीली या 'वार्म व्हाइट' लाइट्स लगाएं। ये आँखों को सुकून देती हैं और माइग्रेन का खतरा कम करती हैं।
  2. इनडायरेक्ट लाइटिंग का जादू: सीधे आँखों पर रोशनी पड़ने के बजाय ऐसे लैंप इस्तेमाल करें जिनका चेहरा दीवार की तरफ हो। इससे रोशनी फैलकर आती है और चुभती नहीं।
  3. नेचुरल लाइट आने दें: सुबह के वक्त परदे हटा दें। सूरज की प्राकृतिक रोशनी आपके मूड और सिरदर्द दोनों के लिए किसी दवा से कम नहीं है।
  4. डिम्मेबल लाइट्स (Dimmable Lights): अगर मुमकिन हो तो ऐसे स्विच लगवाएं जिससे लाइट की चमक कम या ज्यादा की जा सके।