अमित शाह का बड़ा हुंकार, जब नक्सलवाद खत्म हो सकता है, तो घुसपैठियों से भी मुक्त होगी देश की धरती
News India Live, Digital Desk: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार, 21 फरवरी 2026 को देश की आंतरिक सुरक्षा को लेकर एक बड़ा और निर्णायक बयान दिया है। एक राष्ट्रीय सुरक्षा सम्मेलन को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि जिस तरह सरकार ने देश के एक बड़े हिस्से को नक्सलवाद के दंश से मुक्त कराया है, ठीक उसी तरह भारत की पावन धरती को विदेशी घुसपैठियों से भी पूरी तरह मुक्त कराया जाएगा।
नक्सलवाद पर 'फाइनल प्रहार' (Zero Tolerance Policy)
गृह मंत्री ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि पिछले कुछ वर्षों में 'लाल आतंक' (Naxalism) का घेरा सिमटकर बहुत छोटा रह गया है।
सफलता का मंत्र: उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों के शौर्य और केंद्र सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति के कारण आज छत्तीसगढ़ और झारखंड के दुर्गम इलाके भी मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं।
2026 का लक्ष्य: शाह ने दोहराया कि 2026 के अंत तक भारत को पूरी तरह नक्सल मुक्त बनाने का लक्ष्य अब अंतिम चरण में है।
घुसपैठियों के खिलाफ नई रणनीति (Plan Against Intruders)
अमित शाह का इशारा स्पष्ट रूप से सीमावर्ती राज्यों में बढ़ रही अवैध घुसपैठ की ओर था। उन्होंने घुसपैठ को देश की सुरक्षा और जनसांख्यिकी (Demography) के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया।
तकनीकी निगरानी: शाह ने घोषणा की कि सीमा पर अब न केवल फेंसिंग, बल्कि एआई (AI) और आधुनिक सेंसर का इस्तेमाल किया जाएगा ताकि परिंदा भी पर न मार सके।
सख्त कानून: उन्होंने संकेत दिया कि घुसपैठियों की पहचान करने और उन्हें वापस भेजने की प्रक्रिया को और अधिक कानूनी शक्ति दी जाएगी।
शाह के संबोधन की 3 बड़ी बातें
सुरक्षा से समझौता नहीं: आंतरिक सुरक्षा के मामले में कोई भी ढील बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
समन्वय: राज्य पुलिस और केंद्रीय बलों के बीच बेहतर तालमेल ने ही नक्सलवाद की कमर तोड़ी है।
भविष्य का संकल्प: घुसपैठ मुक्त भारत केवल एक वादा नहीं, बल्कि मोदी सरकार का संकल्प है।
विपक्ष की प्रतिक्रिया
गृह मंत्री के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। जहाँ सत्ता पक्ष इसे 'राष्ट्रवाद की जीत' बता रहा है, वहीं विपक्षी दलों ने इसे चुनावी ध्रुवीकरण की कोशिश करार दिया है।