लोकतंत्र के नाम पर ये कैसी दरिंदगी? छत्तीसगढ़ में ऑन-ड्यूटी महिला कांस्टेबल के साथ जो हुआ, वो रोंगटे खड़े कर देगा

Post

News India Live, Digital Desk : हम जिस समाज में रहते हैं, वहां एक महिला को देवी माना जाता है। लेकिन जब वही महिला देश की सेवा के लिए वर्दी पहनती है, तो क्या भीड़ के लिए उसकी कोई मर्यादा नहीं रह जाती? छत्तीसगढ़ के बिलासपुर इलाके में एक प्रदर्शन के दौरान जो मंजर दिखा, वो किसी बुरे सपने जैसा था। वहां तैनात एक महिला कांस्टेबल, जो अपनी ड्यूटी कर रही थी, उसे उपद्रवियों की भीड़ ने अपना निशाना बना लिया।

भीड़ का वह भयावह चेहरा
बताया जा रहा है कि एक संगठन के प्रदर्शन के दौरान भीड़ अचानक हिंसक हो गई। प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही एक महिला पुलिसकर्मी के साथ पहले धक्का-मुक्की हुई और फिर दरिंदगी की हदें पार कर दी गईं। आरोप है कि भीड़ में शामिल कुछ लोगों ने महिला कांस्टेबल को बेदम पीटा, उनके साथ बदसलूकी की और हद तो तब हो गई जब उनके कपड़े फाड़ने की कोशिश हुई। खबर यहाँ तक आई कि कुछ लोग इस पूरी शर्मनाक घटना का मोबाइल से वीडियो बना रहे थे।

सिर्फ चोट नहीं, रूह पर हमला
सोचकर भी दिल दहल उठता है कि जो महिला अधिकारी दूसरों की सुरक्षा के लिए वहां खड़ी थी, उसकी रक्षा करने वाला वहां कोई नहीं था। जब एक वर्दीधारी महिला के साथ इस तरह का व्यवहार हो सकता है, तो एक आम महिला सड़कों पर कितना सुरक्षित महसूस करती होगी? चश्मदीदों की मानें तो उपद्रवी इतने बेलगाम थे कि उन्हें न कानून का डर था और न ही मर्यादा का लिहाज़।

राजनीति बनाम हकीकत
जैसे ही यह घटना वायरल हुई, राज्य की राजनीति भी गरमा गई। विपक्ष ने कानून व्यवस्था पर सवाल उठाए, तो सरकार ने कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिलाया है। लेकिन यहाँ बड़ा सवाल ये है कि क्या सज़ा दे देने से उस महिला पुलिसकर्मी का मानसिक ट्रामा खत्म हो जाएगा? सोशल मीडिया पर लोग लगातार पूछ रहे हैं कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए 'फास्ट ट्रैक' इंसाफ कब मिलेगा?

दोषियों की पहचान और सज़ा का इंतज़ार
पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है और वीडियो फुटेज के आधार पर उन लोगों की पहचान की जा रही है जो इस नीच काम में शामिल थे। समाज में एक सख्त संदेश देना बहुत ज़रूरी हो गया है कि 'प्रदर्शन करने के हक' का मतलब यह नहीं है कि आप किसी महिला की अस्मिता से खेलें।

यह खबर महज़ एक पुलिस रिपोर्ट नहीं है, यह एक सबक है कि भीड़ की मानसिकता कितनी खतरनाक हो सकती है। उम्मीद है कि छत्तीसगढ़ की इस बेटी को जल्द से जल्द न्याय मिलेगा।