छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के गढ़ पर बुलडोजर प्रहार सुरक्षाबलों ने ढहाए 5 स्मारक, खौफ के प्रतीकों को किया जमींदोज
News India Live, Digital Desk: छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर चलते हुए सुरक्षाबलों ने एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। बस्तर संभाग के नक्सल प्रभावित इलाकों में सर्च ऑपरेशन के दौरान जवानों ने नक्सलियों द्वारा अपने साथियों की याद में अवैध रूप से बनाए गए 5 स्मारकों को बुलडोजर और अन्य उपकरणों की मदद से ध्वस्त कर दिया है। प्रशासन का यह कदम नक्सलियों के प्रभाव और उनके 'खौफ' को खत्म करने की दिशा में एक बड़ा संदेश माना जा रहा है।
कार्रवाई का पूरा ब्योरा (Action Details)
सुरक्षाबलों की यह संयुक्त कार्रवाई रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है:
कहां हुई कार्रवाई: यह स्मारक जंगलों के भीतर और गांवों के बाहरी इलाकों में बनाए गए थे, जहाँ नक्सली अक्सर बैठकें करते थे और ग्रामीणों को गुमराह करने के लिए इनका उपयोग 'शहीद स्मारक' के रूप में करते थे।
बुलडोजर का इस्तेमाल: पहली बार नक्सल क्षेत्रों में स्मारकों को हटाने के लिए बुलडोजर जैसी भारी मशीनों का उपयोग देखा गया है, जो सरकार के सख्त इरादों को दर्शाता है।
नष्ट किए गए प्रतीक: इन स्मारकों को लाल रंग से रंगा गया था और इन पर नक्सली विचारधारा से जुड़े संदेश लिखे थे। सुरक्षाबलों ने इन्हें पूरी तरह मलबे में तब्दील कर दिया है।
मनोवैज्ञानिक युद्ध में सुरक्षाबलों की बढ़त
विशेषज्ञों का मानना है कि नक्सलियों के स्मारकों को तोड़ना केवल एक ढांचा गिराना नहीं है, बल्कि यह नक्सलियों के मनोवैज्ञानिक दबाव को कम करने की एक प्रक्रिया है।
गाँव वालों में भरोसा: इन प्रतीकों के हटने से स्थानीय ग्रामीणों के मन से नक्सलियों का डर कम होता है और शासन के प्रति विश्वास बढ़ता है।
नक्सली भर्ती पर चोट: ये स्मारक अक्सर युवाओं को गुमराह करने और उन्हें नक्सली आंदोलन से जोड़ने के लिए एक 'प्रेरणा' के रूप में इस्तेमाल किए जाते थे।
सर्च ऑपरेशन का हिस्सा: सुरक्षाबलों (DRG और CRPF) ने साफ कर दिया है कि आगे भी जहाँ भी ऐसे अवैध निर्माण मिलेंगे, उन्हें तुरंत ध्वस्त किया जाएगा।
नक्सलवाद के खिलाफ 'ऑपरेशन क्लीन'
छत्तीसगढ़ सरकार और गृह मंत्रालय के निर्देश पर नक्सलवाद के खिलाफ अभियान अब तेज हो गया है। एक तरफ जहाँ मुठभेड़ों में नक्सलियों को ढेर किया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ उनकी बुनियादी सुविधाओं और प्रतीकों को नष्ट कर उन्हें आर्थिक और मानसिक रूप से कमजोर किया जा रहा है।