उमर खालिद के लिए सात समंदर पार से उठी आवाज,अमेरिकी सांसदों ने भारतीय राजदूत को पत्र लिखकर क्या मांग की?

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News India Live, Digital Desk : साल 2020 के दिल्ली दंगे और उसके बाद लगा 'UAPA' कानून उमर खालिद के नाम के साथ ये दो बातें साए की तरह जुड़ी हुई हैं। उमर खालिद पिछले कई सालों से जेल में बंद हैं और उनकी जमानत याचिकाएं कई बार निचली अदालतों से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक का चक्कर काट चुकी हैं। लेकिन इस बार चर्चा उनके वकील या भारत की अदालतों की नहीं, बल्कि अमेरिका के 'लॉ मेकर्स' (सांसदों) की हो रही है।

अमेरिका से क्या आई है चिट्ठी?
अमेरिका के कुछ प्रमुख सांसदों ने मिलकर वाशिंगटन में तैनात भारतीय राजदूत को एक औपचारिक पत्र भेजा है। इस पत्र में उन्होंने उमर खालिद की लंबे समय से चली आ रही जेल और अदालती प्रक्रिया में हो रही देरी पर चिंता जताई है। अमेरिकी सांसदों का कहना है कि किसी भी लोकतांत्रिक देश में ट्रायल (सुनवाई) समय पर होनी चाहिए और व्यक्ति के मानवाधिकारों का सम्मान होना चाहिए। उन्होंने इस पत्र के जरिए खालिद के लिए बेल (जमानत) और पारदर्शी सुनवाई की अपील की है।

क्या यह दखलंदाजी है?
अक्सर देखा जाता है कि जब भी किसी देश के आंतरिक या कानूनी मामले में दूसरा देश कोई टिप्पणी करता है, तो इसे 'हस्तक्षेप' के रूप में देखा जाता है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने हमेशा से ही यह स्टैंड लिया है कि भारत की न्यायपालिका पूरी तरह स्वतंत्र है और वह अपने फैसले बिना किसी बाहरी दबाव के लेती है। ऐसे में अमेरिकी सांसदों का यह पत्र सरकार के लिए थोड़ा असहज करने वाला हो सकता है।

सालों से जेल में बंद रहने पर सवाल
खालिद के समर्थकों और कई मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि बिना दोष सिद्ध हुए किसी को सालों तक सलाखों के पीछे रखना न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है। वहीं, जांच एजेंसियों का अपना पक्ष है कि दंगे भड़काने की साजिश में उनके खिलाफ पुख्ता सबूत हैं। इस कश्मकश के बीच अब वाशिंगटन से उठी यह आवाज़ दिखाती है कि मामला सिर्फ स्थानीय नहीं रहा, बल्कि इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ट्रैक किया जा रहा है।

आगे क्या होगा?
जाहिर है, इस चिट्ठी से कोर्ट की प्रक्रिया पर सीधा असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि भारत में कानून की अपनी एक व्यवस्था है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि और मानवाधिकारों को लेकर उठने वाले सवालों को इससे फिर से हवा मिल गई है। अब देखना यह होगा कि भारत सरकार और भारतीय दूतावास इन अमेरिकी सांसदों की चिंता पर क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया देता है।