Uttar Pradesh : क्या अब सुरक्षित नहीं हैं हमारे बच्चे? लखनऊ में सातवीं के छात्र के साथ ऑटो ड्राइवर की घिनौनी करतूत

Post

News India Live, Digital Desk : आज के दौर में एक पेरेंट होने के नाते सबसे बड़ा डर यही होता है कि जब हमारा बच्चा घर से बाहर निकले, तो क्या वो सुरक्षित है? अक्सर हम ऑटो, रिक्शा या वैन वालों पर भरोसा करके अपने बच्चों को स्कूल या ट्यूशन भेज देते हैं। लेकिन लखनऊ से जो खबर आई है, उसने इस भरोसे की बुनियाद को हिलाकर रख दिया है।

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के एक इलाके से दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहाँ सातवीं कक्षा में पढ़ने वाले महज 13-14 साल के एक छात्र के साथ एक ऑटो ड्राइवर ने जो किया, वह समाज के लिए एक गहरा धब्बा है।

वो डरावना सफर और जंगल का सन्नाटा
आज 8 जनवरी 2026 है, और कल से ही लखनऊ के लोगों के बीच इस बात की चर्चा है कि कैसे एक ऑटो ड्राइवर ने अपनी इंसानियत बेच दी। बताया जा रहा है कि आरोपी ने छात्र को बहला-फुसलाकर एक सूनसान वन क्षेत्र (जंगल) में ले गया। वहां उसने बच्चे की लाचारी का फायदा उठाकर उसके साथ गलत काम (कुकरृत्य) किया। जब मासूम इस हादसे से सुन्न हो गया, तो दरिंदे ने उसे डराया कि अगर उसने किसी को भी इसके बारे में बताया, तो वह उसे जान से मार देगा।

हिम्मत और न्याय की जंग
बच्चा किसी तरह घर पहुँचा, पर उसका सहमा हुआ चेहरा और गुमशुम व्यवहार घरवालों को परेशान कर गया। जब परिवार ने प्यार से बच्चे को भरोसे में लिया, तो उसने रोते-रोते अपनी आपबीती सुनाई। सुनकार पैरों तले ज़मीन खिसक गई। घरवाले बिना देर किए पुलिस के पास पहुँचे।

लखनऊ पुलिस ने भी इस मामले में तत्परता दिखाई है। जैसे ही रिपोर्ट दर्ज हुई, आरोपी की तलाश शुरू की गई और उसे धर दबोचा गया। पुलिस ने धारा-377 और पोक्सो (POCSO Act) के तहत मामला दर्ज कर कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिया है। लेकिन सवाल वही है—उस बच्चे के मन पर जो गहरा जख्म लगा है, क्या वो कभी भर पाएगा?

हमें और आपको क्या करना चाहिए?
ऐसी घटनाएँ हमें आगाह करती हैं कि हम बच्चों के साथ 'गुड टच' और 'बैड टच' पर सिर्फ स्कूल की बातों तक सीमित न रहें, बल्कि उनसे हर दिन की बातें शेयर करें।

  1. बच्चों से खुलकर बात करें: अगर बच्चा अचानक चुप रहने लगे या बाहर जाने से डरे, तो उसकी वजह जानने की कोशिश करें।
  2. सफर पर नज़र रखें: अगर मुमकिन हो, तो छोटे बच्चों को अकेले ऑटो या अनजान वाहन में न भेजें। उनके ट्रांसपोर्टर की पूरी जानकारी (आधार, फोटो) अपने पास रखें।
  3. सुरक्षा के टिप्स: बच्चों को समझाएं कि अगर कोई रास्ता बदले या सूनसान जगह ले जाने की कोशिश करे, तो शोर कैसे मचाना है।