US-Iran Tension : ओमान में शांति की बात और पीठ पीछे प्रतिबंधों का वार अमेरिका के एक फैसले से हक्का-बक्का रह गया ईरान, लपेटे में आई भारतीय कंपनी

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News India Live, Digital Desk: कूटनीति की दुनिया में अक्सर जो दिखता है, वह होता नहीं। ओमान की राजधानी मस्कट में जब ईरान और अमेरिका के प्रतिनिधि मेज पर बैठकर तनाव कम करने की कोशिश कर रहे थे, ठीक उसी वक्त वॉशिंगटन से आए एक आदेश ने पूरी दुनिया को चौंका दिया। अमेरिका ने ईरान के तेल और पेट्रोकेमिकल नेटवर्क पर नए और बेहद सख्त प्रतिबंधों (New Sanctions) का ऐलान कर दिया है।

हैरानी की बात यह है कि ये प्रतिबंध वार्ता खत्म होने के कुछ ही मिनटों के भीतर लगाए गए, जिसे ईरान के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है।

क्या है अमेरिका का 'मैक्सिमम प्रेशर' प्लान?

ट्रंप प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि वह ईरान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले तेल निर्यात को पूरी तरह ठप करना चाहता है। इस बार निशाने पर ईरान का वह 'शैडो फ्लीट' (Shadow Fleet) है, जो चोरी-छिपे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तेल पहुंचाता है।

प्रतिबंधों की बड़ी बातें:

15 संस्थाएं और 14 जहाज: अमेरिका ने उन कंपनियों और टैंकरों को ब्लैकलिस्ट किया है जो अवैध रूप से ईरानी तेल का परिवहन कर रहे थे।

भारतीय कनेक्शन: इस कार्रवाई में एक भारतीय कंपनी (Elevate Marine Management) और उसके निदेशक को भी निशाना बनाया गया है, जिन पर ईरान के साथ व्यापार करने का आरोप है।

नया टैरिफ अल्टीमेटम: राष्ट्रपति ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 25% तक अतिरिक्त टैरिफ लगाया जा सकता है।

ओमान वार्ता: उम्मीदों पर फिरा पानी?

मस्कट में हुई इस अप्रत्यक्ष बातचीत को ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने 'सकारात्मक' बताया था। लेकिन वॉशिंगटन के इस कदम ने साफ कर दिया है कि अमेरिका केवल बातों से नहीं, बल्कि कड़े आर्थिक प्रहार से ईरान को झुकने पर मजबूर करना चाहता है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने दो टूक कहा, "ईरान अपने तेल राजस्व का उपयोग आतंकवाद को बढ़ावा देने और अपने ही लोगों के दमन के लिए कर रहा है।"

भारत के लिए क्या हैं इसके मायने?

चूंकि एक भारतीय कंपनी और उसके निदेशक पर भी प्रतिबंध लगाए गए हैं, इसलिए दिल्ली के लिए यह स्थिति संवेदनशील हो गई है। अमेरिका अब उन देशों पर भी दबाव बना रहा है जो सीधे या परोक्ष रूप से ईरान के साथ ऊर्जा क्षेत्र में जुड़े हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि 7 फरवरी के बाद अमेरिका उन देशों की सूची तैयार करेगा जिन पर 'सेकेंडरी प्रतिबंध' लगाए जा सकते हैं।