US-Iran Ceasefire: महायुद्ध की आहट के बीच ट्रंप का 'शांति दांव', 2 हफ्ते का युद्धविराम लागू; व्हाइट हाउस के बाहर विरोध प्रदर्शन, जानें विशेषज्ञों की राय
वॉशिंगटन/तेहरान | पश्चिम एशिया के सुलगते हालातों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक चौंकाने वाला फैसला लेते हुए ईरान के साथ दो सप्ताह के सीजफायर का एलान किया है। इस समझौते के तहत ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को तुरंत खोलने पर राजी हो गया है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति बहाल होने की उम्मीद है। हालांकि, इस फैसले ने अमेरिका के भीतर और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के बीच एक नई बहस को जन्म दे दिया है।
व्हाइट हाउस के बाहर फूटा गुस्सा: 'शासन को जाना होगा'
युद्धविराम की घोषणा के बावजूद व्हाइट हाउस के बाहर माहौल तनावपूर्ण है। बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी वहां जमा हो गए हैं और ट्रंप प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं।
मॉर्गन टेलर (प्रदर्शनकारी): "हम चुनाव तक इंतजार नहीं कर सकते। इस राष्ट्रपति ने व्हाइट हाउस से जो युद्ध अपराध किए हैं, उन्हें रोकना होगा। जब तक यह शासन चला नहीं जाता, हमें हर दिन सड़कों पर उतरना होगा।"
नागरिकों की सुरक्षा पर चिंता: एक अन्य प्रदर्शनकारी ने कहा कि अमेरिकी सेना को बिना किसी ठोस कारण के लापरवाही से बमबारी नहीं करनी चाहिए, जिससे बेगुनाह नागरिकों की जान जाए।
पाकिस्तान की मध्यस्थता पर उठे सवाल: जोनाथन शेंजर का विश्लेषण
फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज (FDD) के कार्यकारी निदेशक और पूर्व अमेरिकी ट्रेजरी अधिकारी जोनाथन शेंजर ने इस समझौते पर हैरानी जताई है। उन्होंने इसे एक 'असामान्य घटना' करार देते हुए कहा:
"यह अजीब है कि पाकिस्तान जैसा देश, जो खुद कई विवादों में रहा है, उसने दो परमाणु महत्वाकांक्षी देशों के बीच मध्यस्थता की है। पाकिस्तान के ऐसा करने के पीछे के असली कारण अभी स्पष्ट नहीं हैं।"
शेंजर ने यह भी चेतावनी दी कि अमेरिका और ईरान के बयानों में जमीन-आसमान का अंतर है। जहां अमेरिका इसे केवल 2 हफ्ते का ब्रेक बता रहा है, वहीं ईरानी इसे अमेरिका का 'पूर्ण आत्मसमर्पण' कह रहे हैं। ईरान का दावा है कि अमेरिका प्रतिबंध हटाने और हर्जाना देने पर राजी हुआ है, जिसे शेंजर ने 'अवास्तविक' बताया है।
युद्धविराम की शर्तें और भविष्य की चुनौतियां
इस 14 दिनों के 'विंडो' में दोनों देशों को एक स्थायी समाधान ढूंढना होगा। फिलहाल की प्रमुख शर्तें इस प्रकार हैं:
होर्मुज जलडमरूमध्य: ईरान इसे सुरक्षित आवाजाही के लिए तुरंत खोलेगा।
हमलों पर रोक: दोनों देश एक-दूसरे पर कोई सैन्य कार्रवाई नहीं करेंगे।
ईरान का रुख: विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची ने स्पष्ट किया है कि जब तक अमेरिका हमला नहीं करता, ईरान की सेना शांत रहेगी।