US-Iran Ceasefire: दुनिया ने ली राहत की सांस! ट्रंप और ईरान के बीच 2 हफ्ते का युद्धविराम, जानें क्या है वो 10 और 15 सूत्रीय फॉर्मूला जिसने टाला महायुद्ध?
वॉशिंगटन/तेहरान | वैश्विक मंच पर गहराते युद्ध के बादलों के बीच एक ऐसी खबर आई है जिसने पूरी दुनिया को बड़ी राहत दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई पर दो सप्ताह के लिए सीजफायर (संघर्ष विराम) का एलान कर दिया है। यह कूटनीतिक सफलता ऐसे समय में मिली है जब कुछ ही घंटों के भीतर अमेरिका ईरान के प्रमुख ठिकानों पर 'विनाशकारी' हमले करने वाला था। इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान की मध्यस्थता ने 'गेम चेंजर' की भूमिका निभाई है।
ट्रंप की डेडलाइन टली, ईरानी बुनियादी ढांचे को मिली राहत
ट्रंप प्रशासन ने उन सभी सैन्य आदेशों पर फिलहाल दो हफ्तों के लिए रोक लगा दी है, जिनमें ईरान के पावर प्लांट्स और पुलों को निशाना बनाने की बात कही गई थी। ट्रंप ने 'ट्रुथ सोशल' पर जारी संदेश में संकेत दिया कि अमेरिका ने अपने प्राथमिक 'मिलिट्री टारगेट' हासिल कर लिए हैं और अब प्राथमिकता क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करना है। इस कदम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ट्रंप की कूटनीतिक जीत और युद्ध टालने के एक रणनीतिक फैसले के रूप में देखा जा रहा है।
होर्मुज स्ट्रेट खोलने की शर्त पर राजी हुआ ईरान
इस सीजफायर की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण शर्त होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से जुड़ी है। ईरान ने वैश्विक तेल आपूर्ति की इस जीवनरेखा को तुरंत और पूरी तरह से खोलने पर सहमति दे दी है। गौरतलब है कि दुनिया के करीब 20% कच्चे तेल की सप्लाई इसी रास्ते से होती है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि अगर अमेरिका हमले नहीं करता है, तो ईरान भी अपनी रक्षात्मक कार्रवाई रोक देगा और जहाजों को सुरक्षित रास्ता प्रदान करेगा।
क्या है शांति का 10 और 15 सूत्रीय फॉर्मूला?
आने वाले 14 दिन कूटनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होने वाले हैं, क्योंकि दोनों देशों ने अपनी-अपनी शर्तें मेज पर रख दी हैं:
ईरान का 10-सूत्रीय प्रस्ताव: तेहरान ने एक विशेष शांति मसौदा पेश किया है, जिसे व्हाइट हाउस ने 'प्रैक्टिकल' (व्यावहारिक) माना है।
अमेरिका का 15-सूत्रीय प्लान: जवाब में अमेरिका ने भी अपनी सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता से जुड़ी 15 शर्तें रखी हैं।
अब दोनों देशों के राजनयिक इन दोनों प्रस्तावों के बीच एक साझा रास्ता (Common Ground) खोजने के लिए बातचीत करेंगे।
शहबाज शरीफ और जनरल मुनीर की मध्यस्थता का असर
ईरान ने इस समझौते का श्रेय पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के प्रयासों को दिया है। पाकिस्तान की इस कूटनीतिक सक्रियता ने न केवल दो परमाणु शक्तियों और बड़े सैन्य देशों के बीच तनाव कम किया, बल्कि एशियाई बाजारों को भी बड़ी राहत दी है। इस घोषणा के बाद से ही एशियाई शेयर बाजारों में जबरदस्त हरियाली (उछाल) देखने को मिल रही है।
आगे की राह: 10 अप्रैल की इस्लामाबाद बैठक पर टिकी निगाहें
भले ही यह सीजफायर केवल दो हफ्तों के लिए है, लेकिन इसे एक स्थायी शांति समझौते की दिशा में 'विंडो' के रूप में देखा जा रहा है। 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में होने वाली उच्च स्तरीय बातचीत में युद्ध के स्थायी समाधान पर चर्चा होगी। तेहरान में लोग इस समझौते का जश्न मना रहे हैं, वहीं ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट की संभावनाओं ने अर्थव्यवस्था को मजबूती दी है।