UP Deepfake Policy : तकनीक की दुनिया में यूपी का नया उदय तरक्की के साथ अब सुरक्षा का भी पहरा
News India Live, Digital Desk: अक्सर जब हम टेक्नोलॉजी या आईटी हब की बात करते हैं, तो दिमाग में बेंगलुरु या हैदराबाद का नाम आता है। लेकिन अब समय बदल रहा है। उत्तर प्रदेश ने भी इस दौड़ में अपनी मज़बूत दावेदारी पेश कर दी है। कैबिनेट मंत्री जितिन प्रसाद ने हाल ही में साफ़ किया है कि उत्तर प्रदेश अब सिर्फ़ खेती या परंपराओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक 'ग्लोबल टेक डेस्टिनेशन' (Global Tech Destination) बनने की राह पर है।
इन्वेस्टमेंट के साथ आएंगे नए अवसर
सरकार का विजन साफ़ है उत्तर प्रदेश को आईटी की दुनिया का नया पता बनाना। जितिन प्रसाद के मुताबिक, बड़े-बड़े टेक दिग्गज अब यूपी में अपनी रुचि दिखा रहे हैं। इसका सीधा मतलब है हज़ारों नए रोज़गार और हमारे प्रदेश के युवाओं को घर के पास ही बड़ी कंपनियों में काम करने का मौका।
पर 'डीपफेक' की चुनौती भी बड़ी है
जितनी रफ़्तार से इंटरनेट बढ़ा है, उतनी ही तेज़ी से नए खतरे भी आए हैं। आजकल आपने सुना होगा कि एआई (AI) का इस्तेमाल करके किसी के भी चेहरे या आवाज़ को बदलकर गलत वीडियो बना दिए जाते हैं, जिसे 'डीपफेक' कहा जाता है। ये किसी की भी मान-मर्यादा और निजता के लिए बड़ा खतरा है।
इस पर नकेल कसने के लिए जितिन प्रसाद ने एक बहुत बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार बहुत जल्द 'डीपफेक' के खिलाफ एक सख्त पॉलिसी लाने वाली है। इस नीति का मकसद तकनीक का गलत इस्तेमाल करने वालों के मन में डर पैदा करना और पीड़ितों को तुरंत न्याय दिलाना है।
तकनीक से नहीं, उसकी जालसाजी से है जंग
सरकार का मानना है कि हम तकनीक के दुश्मन नहीं हैं, बल्कि उसके ज़रिए हो रहे अपराधों के खिलाफ़ हैं। यूपी में नई डेटा सेंटर पॉलिसी और आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर को इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि सुरक्षा के मानकों में कोई कमी न रहे। डीपफेक के जालसाजों को संदेश साफ़ है उत्तर प्रदेश में अब उनके लिए जगह नहीं बची है।