BRD Medical College : मौत के बाद भी सुकून नहीं? गोरखपुर के इस अस्पताल की बड़ी लापरवाही की कहानी

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News India Live, Digital Desk: कहते हैं कि इंसान की अंतिम विदाई सबसे सम्मानजनक होनी चाहिए। लेकिन गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में जो हुआ, वह किसी भी परिवार के लिए एक खौफनाक सपना साबित हो सकता है। यहाँ एक ही दिन दो अलग-अलग परिवारों ने अपनों को खोया, लेकिन अस्पताल की 'मुर्दाघर' (Mortuary) टीम की एक छोटी सी लापरवाही ने दोनों परिवारों की खुशियों को तो पहले ही मातम में बदला था, अब उनके आखिरी हक़ पर भी चोट कर दी।

आखिर कैसे हुई ये भयानक गल्ती?
दो अलग-अलग लोग इलाज के लिए भर्ती थे। नियति ने दोनों का अंत लिखा था। जब दोनों की मौत हुई, तो उनके शवों को टैग करके सुरक्षित रख दिया गया। लेकिन असली ड्रामा तब शुरू हुआ जब परिवारों को शव सौंपने की बारी आई। अस्पताल के कर्मचारियों ने बिना ठीक से शिनाख्त (Identity) कराए शव परिजनों को सौंप दिए।

एक परिवार तो शव को लेकर श्मशान घाट तक पहुँच गया। सब कुछ तैयार था, पंडित जी मंत्र पढ़ रहे थे, बस मुखाग्नि की बारी ही थी कि परिवार के एक सदस्य ने 'अंतिम दर्शन' के लिए चेहरा देखने की इच्छा जताई। जैसे ही सफेद चादर हटी, सबकी रूह कांप गई सामने वाला शख्स कोई अजनबी था!

श्मशान से अस्पताल तक का वो 'डरावना' सफर
हड़बड़ाहट में अंतिम संस्कार रुकवाया गया और तुरंत मेडिकल कॉलेज को फोन किया गया। दूसरी तरफ, दूसरा परिवार भी असमंजस में था। जब दोनों परिवारों का आमना-सामना हुआ और पुलिस भी मौके पर पहुँची, तब जाकर पता चला कि लाशों की अदला-बदली हो गई है। सोचिए उन परिजनों का हाल, जो अपने पिता या भाई को विदा करने आए थे और उन्हें दर-दर भटकना पड़ रहा था।

सवाल तो पूछे जाएंगे!
क्या किसी मेडिकल कॉलेज का प्रशासन इतना गैर-ज़िम्मेदार हो सकता है? क्या किसी की लाश को सिर्फ़ एक नंबर या फाइल समझ लिया गया है? परिजनों का आरोप है कि वहां तैनात कर्मचारियों ने ड्यूटी में लापरवाही की। अगर उस समय श्मशान घाट पर चेहरा देखने की ज़िद न की जाती, तो शायद वो अभागा इंसान किसी गैर के हाथों जला दिया जाता और उसका असली परिवार पूरी उम्र उसकी लाश को ढूंढता रह जाता।