डॉलर के सामने पस्त हुआ रुपया 92.35 के ऑल टाइम लो पर पहुंचा जानें आपकी जेब और बजट पर क्या होगा असर

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News India Live, Digital Desk : अंतरराष्ट्रीय बाजार में जारी भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) और कच्चे तेल की कीमतों में आए उबाल ने भारतीय रुपये की कमर तोड़ दी है। सोमवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 53 पैसे की भारी गिरावट के साथ 92.35 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर बंद हुआ। यह रुपये के इतिहास की सबसे बड़ी गिरावटों में से एक है, जिसने भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।

क्यों टूटा रुपया? गिरावट के 3 बड़े कारण

विशेषज्ञों के अनुसार, रुपये की इस रिकॉर्ड गिरावट के पीछे मुख्य रूप से तीन बड़ी वजहें हैं:

कच्चे तेल की कीमतों में आग: ईरान-इजरायल संघर्ष के कारण ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल आयात करता है, जिससे डॉलर की मांग बढ़ गई है।

विदेशी निवेशकों की निकासी: शेयर बाजार में जारी भारी बिकवाली के बीच विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FIIs) ने भारतीय बाजार से बड़े पैमाने पर पैसा निकाला है।

डॉलर इंडेक्स की मजबूती: वैश्विक अनिश्चितता के दौर में सुरक्षित निवेश के लिए दुनिया भर के निवेशक अमेरिकी डॉलर की ओर भाग रहे हैं, जिससे डॉलर की ताकत बढ़ गई है।

मार्केट का हाल: खुलते ही मची अफरा-तफरी

सोमवार को इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में रुपया 92.22 पर खुला था। कारोबार के दौरान यह थोड़ा सुधरा लेकिन फिर लगातार गिरता चला गया। इससे पहले पिछले हफ्ते शुक्रवार को रुपया 91.82 पर बंद हुआ था। बाजार के जानकारों का मानना है कि अगर मिडिल ईस्ट में तनाव कम नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में रुपया 93 के स्तर को भी पार कर सकता है।

आम आदमी पर क्या होगा असर?

रुपये के कमजोर होने का सीधा मतलब है 'महंगाई का झटका'।

महंगा होगा आयात: इलेक्ट्रॉनिक्स, गैजेट्स और कच्चा तेल महंगा होने से घरेलू बाजार में सामान की कीमतें बढ़ सकती हैं।

विदेश यात्रा और पढ़ाई: अगर आपका बच्चा विदेश में पढ़ रहा है या आप विदेश घूमने की योजना बना रहे हैं, तो अब आपको ज्यादा पैसे खर्च करने होंगे।

पेट्रोल-डीजल की कीमतें: कच्चे तेल के आयात बिल में बढ़ोतरी होने से आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल के रेट बढ़ सकते हैं।