उत्तर प्रदेश की ये सरकारी अधिकारी और 8 दिनों की वो सीक्रेट डील जब CBI ने रंगे हाथों पकड़ा
News India Live, Digital Desk : भ्रष्टाचार और रिश्वत के मामले हमारे सिस्टम के लिए कोई नई बात नहीं हैं, लेकिन कुछ घटनाएँ ऐसी होती हैं जहाँ अधिकारी का आत्मविश्वास ही उसे भारी पड़ जाता है। उत्तर प्रदेश से हाल ही में एक ऐसी ही खबर आई, जिसने प्रशासनिक महकमे में हलचल मचा दी है। मामला जुड़ा है डिप्टी कमिश्नर प्रभा भंडारी (Prabha Bhandari) से, जिन्हें सीबीआई (CBI) ने एक बहुत ही चालाकी से बिछाए गए जाल में गिरफ्तार किया है।
मामला आखिर था क्या?
यह कहानी किसी फ़िल्मी ड्रामा से कम नहीं है। रिपोर्टों के अनुसार, यह कोई अचानक हुई छापेमारी नहीं थी, बल्कि एक बहुत ही गहरी प्लानिंग का हिस्सा थी। बात लगभग 8 दिन पहले शुरू हुई थी। प्रभा भंडारी और सामने वाले पक्ष (शिकायतकर्ता) के बीच एक 'डील' यानी रिश्वत के लेन-देन की बात चल रही थी। मज़े की बात ये है कि यह मोलतोल कोई एक या दो बार में खत्म नहीं हुई, बल्कि पूरे आठ दिनों तक (Eight-day deal) अधिकारियों और डिप्टी कमिश्नर के बीच यह 'बातचीत' चलती रही।
कैसे बिछाया गया CBI का जाल?
शायद प्रभा भंडारी को यह अंदाज़ा भी नहीं था कि जिसके साथ वह रिश्वत की सेटिंग कर रही हैं, उसने पहले ही सीबीआई से संपर्क साध लिया था। सीबीआई की टीम ने अपनी पूरी रणनीति तैयार की और उन आठ दिनों के दौरान हर एक बातचीत पर पैनी नज़र रखी। जैसे ही 8वें दिन पैसे के लेन-देन की जगह और वक्त तय हुआ, सीबीआई की टीम सक्रिय हो गई।
जैसे ही घूस की रकम डिप्टी कमिश्नर तक पहुँची, सीबीआई की जाल में वह बुरी तरह फँस गईं। उन्हें रंगे हाथों दबोचा गया। बताया जा रहा है कि सीबीआई ने पुख्ता सबूत जुटाने के लिए हर तकनीकी चीज़ का इस्तेमाल किया ताकि केस पूरी तरह मज़बूत रहे।
आज के सिस्टम का एक और चेहरा
आज यानी 2026 की शुरुआत में, जहाँ प्रशासन को और ज़्यादा पारदर्शी (Transparent) बनाने की कोशिश हो रही है, वहां इतने बड़े पद पर बैठे अधिकारी का ऐसी हरकतों में शामिल होना हैरान करने वाला है। प्रभा भंडारी की गिरफ्तारी (CBI arrest Prabha Bhandari) ने यह साफ़ कर दिया है कि भले ही आप कितने ही बड़े रसूखदार क्यों न हों, कानून के लंबे हाथों से बचना इतना आसान नहीं है।
अक्सर ऐसे मामलों में जो सबसे बड़ी चूक होती है, वह है 'लगातार होता मोलतोल'। सीबीआई ने उसी समय का फायदा उठाकर अपना केस मज़बूत किया और आख़िरकार उस भ्रष्टाचार पर लगाम कसी जिसकी शिकायत लंबे समय से दबी हुई थी। फिलहाल इस पूरे मामले की गहराई से जाँच चल रही है, लेकिन उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में इसे एक बड़े 'सबक' के रूप में देखा जा रहा है।