बरेली में नए साल का जश्न या मैदान-ए-जंग? डीजे बंद कराने गई पुलिस पर हमला, वर्दी तक फाड़ डाली
News India Live, Digital Desk : आज 1 जनवरी, 2026 है। जहाँ एक तरफ पूरा देश नए साल की खुशियों में डूबा है, वहीं उत्तर प्रदेश के बरेली से एक ऐसी खबर आई है जो वाकई परेशान करने वाली है। कल रात जब लोग 2026 के स्वागत में झूम रहे थे, उसी वक्त बरेली के एक इलाके में जश्न का माहौल अचानक "मैदान-ए-जंग" में तब्दील हो गया।
क्या है पूरी कहानी?
हुआ यह कि नए साल की पार्टी (New Year Party) चल रही थी और डीजे की धमक अपनी चरम सीमा पर थी। जब वक्त काफी ज्यादा हो गया, तो पुलिस टीम को इसकी खबर मिली। नियम के मुताबिक रात में देर तक तेज संगीत बजाना मना है। ऐसे में बरेली पुलिस की एक टीम मौके पर पहुँची ताकि शांति व्यवस्था बनी रहे और डीजे बंद कराया जा सके।
पुलिस का वहां जाना शायद जश्न में डूबे हुड़दंगियों को रास नहीं आया। बात बस इतनी थी कि संगीत बंद करना है, लेकिन वहाँ मौजूद कुछ नशे में चूर लोगों ने पुलिस टीम के साथ बदतमीजी शुरू कर दी।
पुलिस टीम पर हमला और वर्दी फाड़ने की हिम्मत
हैरानी की बात तो यह है कि हंगामा सिर्फ कहासुनी तक ही सीमित नहीं रहा। देखते ही देखते भीड़ बेकाबू हो गई और पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की करने लगी। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि स्थिति इतनी बिगड़ गई कि लोगों ने पुलिसवालों पर हमला (Attack on Police) कर दिया और यहाँ तक कि वर्दी तक फाड़ डाली। एक सिपाही की वर्दी पर हाथ उठाना कानून का कितना बड़ा मज़ाक है, यह हम सब जानते हैं।
सोचिए, जो पुलिसकर्मी हमें सुरक्षित रखने के लिए अपनी नींद खराब कर सड़कों पर तैनात थे, उनके साथ ऐसी बदसलूकी की गई। बरेली पुलिस (Bareilly Police) की इस टीम पर हुए हमले के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और पुलिस की अतिरिक्त कुमक को मौके पर बुलाना पड़ा।
आगे की कार्रवाई और सवाल
अब पुलिस उन चेहरों की पहचान कर रही है जिन्होंने इस पूरी घटना को अंजाम दिया। कानून का डर शायद उन लोगों में बिल्कुल नहीं था, जिन्हें पुलिस की मौजूदगी से फर्क नहीं पड़ा। बरेली पुलिस टीम पर हमला (Bareilly Police team attack case) के इस मामले में सख़्त से सख़्त कार्रवाई होना तय है, ताकि भविष्य में कोई वर्दी का इस तरह अपमान न कर सके।
नए साल का मतलब खुशियाँ बाँटना और सभ्य तरीके से सेलिब्रेट करना होना चाहिए। किसी की शांति भंग करना या नियम तोड़ने पर टोके जाने पर कानून को हाथ में लेना कहाँ की समझदारी है? बरेली की इस घटना ने उत्सव के नाम पर होने वाली 'हुड़दंग संस्कृति' पर फिर से सवाल खड़ा कर दिया है।
हम उम्मीद करते हैं कि प्रशासन इन अराजक तत्वों को कड़ा सबक सिखाएगा ताकि आम जनता और कानून की रक्षा करने वालों का सम्मान बना रहे।