चंडीगढ़ मेयर चुनाव से पहले बड़ा खेला? अकाली पार्षद की गिरफ्तारी पर भड़के चरणजीत सिंह विल्ली

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News India Live, Digital Desk : चंडीगढ़ की राजनीति में इस वक्त गरमाहठ अपने चरम पर है। वजह है मेयर चुनाव की आहट और उससे ठीक पहले शुरू हुई पुलिसिया कार्रवाई। शिरोमणि अकाली दल (SAD) के खेमे में उस वक्त हड़कंप मच गया जब उनके एक पार्षद को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। इस गिरफ्तारी ने अब एक बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले लिया है। चंडीगढ़ अकाली दल के प्रधान चरणजीत सिंह विल्ली (Charanjit Singh Willi) ने इस कार्रवाई पर कड़ा एतराज जताया है और इसे सीधे तौर पर 'लोकतंत्र का गला घोंटने' वाली घटना बताया है।

आखिर 'टाइमिंग' पर सवाल क्यों?

चरणजीत सिंह विल्ली ने सबसे बड़ा सवाल 'समय' यानी टाइमिंग को लेकर उठाया है। उनका कहना है, "भाई, अगर कोई मामला था भी, तो इतने दिन पुलिस क्या कर रही थी? अब जब मेयर चुनाव बिलकुल सिर पर हैं, हर एक वोट कीमती है, ठीक उसी वक्त हमारे पार्षद को गिरफ्तार करना क्या दर्शाता है?"

विल्ली का साफ आरोप है कि यह गिरफ्तारी कानून का पालन करवाने के लिए नहीं, बल्कि मेयर चुनाव (Mayoral Election) को प्रभावित करने के लिए की गई है। सियासी गलियारों में भी चर्चा है कि क्या विपक्षी पार्षदों पर दबाव बनाने के लिए पुलिस का इस्तेमाल किया जा रहा है?

गिरफ्तारी के तरीके पर भी उंगली उठी

विल्ली सिर्फ टाइमिंग से नाराज नहीं हैं, बल्कि जिस तरह से गिरफ्तारी हुई, वह भी उन्हें नागवार गुजरी है। उनका कहना है कि एक चुने हुए जनप्रतिनिधि के साथ अपराधियों जैसा सलूक क्यों? क्या पुलिस प्रशासन के ऊपर ऊपर से कोई 'खास ऑर्डर' आया था? उन्होंने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई पूरी तरह से सत्ता पक्ष के इशारे पर हो रही है ताकि विरोधियों का मनोबल तोड़ा जा सके।

क्या है असली 'खेल'?

चंडीगढ़ का मेयर चुनाव हमेशा से रोमांचक और विवादास्पद रहा है। यहाँ एक-एक पार्षद की वोटिंग से हार-जीत तय होती है। अकाली दल का मानना है कि उनकी पार्टी और गठबंधन को कमजोर करने के लिए सरकारी मशीनरी का दुरूपयोग हो रहा है। विल्ली ने चेतावनी दी है कि वे इस धक्केशाही को बर्दाश्त नहीं करेंगे और ईंट का जवाब पत्थर से देंगे।

जनता क्या सोच रही है?

सोशल मीडिया पर और आम जनता के बीच भी यह मुद्दा चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग सवाल कर रहे हैं कि चुनाव से एन पहले ऐसी कार्रवाइयां निष्पक्षता पर शक पैदा करती हैं।

फिलहाल, चरणजीत सिंह विल्ली के तेवर बता रहे हैं कि अकाली दल इस मुद्दे को शांत नहीं होने देगा। यह देखना दिलचस्प होगा कि पुलिस प्रशासन इन तीखे सवालों का क्या जवाब देता है। क्या यह वाकई कोई कानूनी प्रक्रिया थी या फिर सच में पर्दे के पीछे कोई 'सियासी स्क्रिप्ट' लिखी जा रही है?