Indian Agriculture : ईरान की जंग में झुलस जाएगी पंजाब की खुशबू? 12,000 करोड़ का बासमती चावल संकट में
News India Live, Digital Desk : हम सब जानते हैं कि भारत के बासमती चावल की महक पूरी दुनिया में मशहूर है। पंजाब और हरियाणा के खेतों में जब यह फसल लहलहाती है, तो किसानों की आंखों में एक सपना होता है अपनी उपज को विदेशों में ऊँचे दामों पर बेचना। लेकिन कभी-कभी सरहद पार के हालात ऐसी मुसीबत खड़ी कर देते हैं, जिसका सीधा असर हमारे गाँव और घर की कमाई पर पड़ता है।
ईरान में चल रहे ताज़ा संकट ने कुछ ऐसा ही माहौल बना दिया है।
ईरान हमारा इतना बड़ा बाज़ार क्यों है?
ईरान भारतीय बासमती चावल का सबसे बड़ा खरीदार है। हर साल यहाँ से हज़ारों टन चावल समुद्री जहाज़ों के ज़रिए ईरान भेजा जाता है। लेकिन वहां की ताज़ा तनावपूर्ण स्थिति और लड़ाई के खतरों की वजह से यह व्यापार अब लगभग रुक सा गया है। करीब 12,000 करोड़ रुपये का कारोबार दांव पर लगा है, जो भारत की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा झटका है।
पेमेंट और शिपिंग का बड़ा पेंच
असली दिक्कत यह नहीं है कि उन्हें चावल पसंद नहीं आ रहा, दिक्कत ये है कि 'रास्ता और पैसा' दोनों फंस गए हैं।
- शिपिंग रूट का खतरा: समुद्र के जिन रास्तों (रेड सी) से चावल के कंटेनर जाते हैं, वहां अब सुरक्षा का भारी संकट है। समुद्री जहाज़ों के मालिकों ने किराये (Freight) बढ़ा दिए हैं और कई रास्ते बंद कर दिए गए हैं।
- रुकी हुई पेमेंट: ईरान में बिगड़ते आर्थिक और राजनीतिक हालात की वजह से भारतीय निर्यातकों को समय पर पैसा मिलने की गारंटी नहीं मिल पा रही। लाखों रुपये का माल बीच रास्ते या बंदरगाहों पर पड़ा हुआ है।
किसान और व्यापारियों पर क्या बीत रही है?
मंडियों में जो बासमती ऊंचे भाव पर बिकने वाला था, उसके दाम गिरने की आशंका है। जब विदेशों में माल ही नहीं जा पाएगा, तो वह देश की मंडियों में ही पड़ा रहेगा और ज़्यादा सप्लाई की वजह से किसानों को उनकी लागत भी निकालना मुश्किल हो जाएगा। निर्यातकों का कहना है कि अगर जल्द ही भारत सरकार और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने दखल नहीं दिया, तो छोटे कारोबारियों का दीवाला निकलना तय है।
अब आगे क्या?
यह सिर्फ़ व्यापार की बात नहीं है, बल्कि उन हज़ारों किसानों के पसीने की बात है जिन्होंने कड़ाके की ठंड में खेत सींचे थे। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि भारत को अब ईरान के अलावा दूसरे देशों (जैसे सऊदी अरब या इराक) की मंडियों में भी अपनी जगह और मज़बूत करनी होगी ताकि किसी एक देश के भरोसे हमारा व्यापार ठप्प न हो।
ईरान के हालात कब तक ठीक होंगे, यह तो कोई नहीं जानता, लेकिन इतना ज़रूर है कि वहां की आग ने हमारे बासमती के बाज़ार को थोड़ा झुलसा ज़रूर दिया है।