गुरु के नाम पर सियासत ,जत्थेदार कुलदीप सिंह ने बताया क्यों 328 पावन स्वरूपों पर राजनीति करना है गलत
News India Live, Digital Desk: पंजाब की धरती और सिख पंथ के लिए श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का सम्मान सबसे ऊपर है। पिछले कुछ समय से 328 पावन स्वरूपों (Holy Forms) की गुमशुदगी का जो मामला गरमाया हुआ है, वह हर किसी को परेशान कर रहा है। लेकिन दुख की बात यह है कि इस गंभीर और धार्मिक मसले पर समाधान ढूंढने के बजाय, राजनीतिक पार्टियां इसे एक-दूसरे को नीचा दिखाने का जरिया बना रही हैं।
इसी बात से आहत होकर जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गरगज (Jathedar Giani Kuldeep Singh Gargajj) ने बहुत ही साफ और खरी बात कही है। उनका मानना है कि पवित्र स्वरूपों के नाम पर जो सियासत हो रही है, उसे अब तुरंत बंद कर देना चाहिए।
असल मसला क्या है और दर्द कहाँ है?
328 पावन स्वरूपों का मामला सीधा सिखों की सर्वोच्च संस्था एसजीपीसी (SGPC) के रिकॉर्ड और उनकी सुरक्षा से जुड़ा है। यह मामला महज़ कुछ आंकड़ों या कागजों की गुमशुदगी का नहीं है, यह कौम के 'जींवत गुरु' के प्रति जिम्मेदारी का है। जत्थेदार जी का कहना है कि इस मामले को सुलझाने के लिए गंभीर पंथिक सोच की जरूरत है, न कि रैलियों में की जाने वाली बयानबाजी की।
क्यों हो रही है नाराजगी?
जत्थेदार गरगज ने सवाल उठाया है कि जब भी चुनाव करीब आते हैं या राजनीतिक माहौल गर्माता है, तब इस मुद्दे को क्यों उछाला जाता है? नेताओं का काम जनता की समस्याओं को सुलझाना है, लेकिन यहाँ गुरु के पावन स्वरूपों का इस्तेमाल एक-दूसरे पर कीचड़ उछालने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने साफ़ कहा कि ऐसा करना सिख परंपराओं और आस्था का अपमान है।
शांति और एकता की अपील
ज्ञानी कुलदीप सिंह गरगज ने सभी पक्षों से अपील की है कि वे गुरु साहिब के प्रति अपनी श्रद्धा दिखाएं। राजनीति को धर्म से ऊपर रखना समाज के लिए कभी भी फायदेमंद नहीं रहा। उन्होंने साफ़ शब्दों में कहा कि यदि इस मामले की तह तक जाना है, तो निष्पक्षता और पवित्रता के साथ काम करना होगा।
उनका यह बयान उस समय आया है जब सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक कई गुट इस मुद्दे पर आपस में भिड़ते नजर आ रहे हैं। जत्थेदार साहब का मानना है कि गुरु का दर और गुरु के वचन सभी को जोड़ने के लिए हैं, तोड़ने के लिए नहीं।