UP की अदालत में गहराया चेंबर संकट खुद को कमरे में कैद कर वकीलों ने क्यों कहा अब आख़िरी रास्ता ही बचा है
News India Live, Digital Desk: नए साल की सुबह उत्तर प्रदेश के इस अदालत परिसर में सुरक्षा बलों और प्रशासन की भागदौड़ से शुरू हुई। दरअसल, यहाँ काफी समय से वकीलों के लिए बैठने और उनके चेंबर (Lawyers' Chambers) के लिए जगह की समस्या चल रही थी। वकीलों का कहना है कि वे काफी समय से अपनी मांगों को प्रशासन के सामने रख रहे हैं, लेकिन कोई हल नहीं निकल रहा था।
रात के अंधेरे में चला ऑपरेशन
कहा जाता है कि मजबूरी क्या कुछ नहीं करवाती। वकीलों ने अपनी बात मनवाने या अपना हक लेने के लिए एक ऐसा रास्ता चुना जिसने सबको चौंका दिया। कड़कड़ाती ठंड के बीच, रात के सन्नाटे का फायदा उठाते हुए वकीलों के एक गुट ने कचहरी परिसर में लोहे के पिलर और टीन के शेड (sheds) खड़े कर दिए। जब तक प्रशासन को खबर होती, सुबह होने तक कई छोटे-छोटे केबिन जैसे चेंबर बनकर तैयार हो चुके थे।
धमकी और खुद को बंद करना
लेकिन बात सिर्फ शेड बनाने तक ही सीमित नहीं रही। जैसे ही पुलिस और स्थानीय प्रशासन को इसकी भनक लगी और वे निर्माण को हटाने पहुँचे, वहां स्थिति तनावपूर्ण हो गई। वकीलों ने पीछे हटने के बजाय खुद को नवनिर्मित चेंबरों के अंदर बंद कर लिया। माहौल तब और ज़्यादा बिगड़ गया जब वकीलों ने प्रशासन को चुनौती दी कि अगर उनके चेंबर हटाए गए, तो वे आत्महत्या (suicide threat) जैसा कदम उठाने से पीछे नहीं हटेंगे।
क्यों पैदा हुई ऐसी स्थिति?
एक आम इंसान की नज़र से देखें तो यह कानून व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती है, लेकिन वकीलों की अपनी पीड़ा है। उनका तर्क है कि बिना चेंबर के उन्हें केस पढ़ने और मुवक्किलों से बात करने में भारी दिक्कत आती है। कई युवा वकील तो धूप और बारिश में सड़कों के किनारे बैठने को मजबूर हैं। इसी नाराजगी ने आज उग्र रूप ले लिया है।
मौके पर क्या हाल है?
अभी वहां भारी पुलिस बल तैनात है और आला अधिकारी वकीलों को समझाने-बुझाने की कोशिश कर रहे हैं। मामला काफी संवेदनशील हो चुका है क्योंकि एक तरफ कानूनी प्रक्रिया (legal procedure) है और दूसरी तरफ सैकड़ों वकीलों की नाराजगी और उनके जज़्बात।
आज 2026 की पहली सुबह कानून के गलियारों में जो तस्वीर दिख रही है, वो यह सोचने पर मजबूर करती है कि आख़िर संवाद की कमी ने इतने गंभीर संकट को जन्म कैसे दिया? उम्मीद है कि जल्द ही इसका कोई ऐसा बीच का रास्ता निकलेगा जिससे कोर्ट परिसर की गरिमा बनी रहे और वकीलों की समस्या का भी समाधान हो सके।