मिडिल ईस्ट में महासंग्राम की आहट? ट्रंप की सैन्य धमकी से डरा इज़राइल, जिनेवा में होने वाली है अमेरिका-ईरान की बैठक

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News India Live, Digital Desk : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को एक बार फिर कड़े लहजे में चेतावनी दी है। जिनेवा में मंगलवार (17 फरवरी 2026) को होने वाली दूसरे दौर की परमाणु वार्ता से ठीक पहले ट्रंप ने कहा है कि यदि ईरान इस बार समझौते के लिए तैयार नहीं होता, तो इसके परिणाम "बेहद दर्दनाक" (Very Traumatic) होंगे। ट्रंप के इस बयान ने न केवल ईरान बल्कि इज़राइल की चिंताओं को भी बढ़ा दिया है।

जिनेवा वार्ता: क्या है ट्रंप का 'अंतिम अल्टीमेटम'?

ओमान की मध्यस्थता में हो रही यह बातचीत दशकों से चले आ रहे विवाद को सुलझाने का आखिरी मौका मानी जा रही है।

ट्रंप की शर्त: अमेरिका चाहता है कि ईरान न केवल अपना परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह बंद करे, बल्कि अपनी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता और क्षेत्रीय प्रॉक्सी समूहों (हिजबुल्लाह, हमास) को मिलने वाली मदद भी खत्म करे।

सैन्य दबाव: चेतावनी के साथ ही ट्रंप ने दुनिया का सबसे बड़ा विमानवाहक पोत USS Gerald R. Ford को मिडिल ईस्ट भेजने का आदेश दे दिया है। यह क्षेत्र में पहले से मौजूद USS Abraham Lincoln के साथ मिलकर ईरान पर दबाव बनाएगा।

इज़राइल की घबराहट के पीछे का सच

इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हाल ही में वाशिंगटन में ट्रंप से मुलाकात की थी। इज़राइल का डर यह है कि यदि ट्रंप और ईरान के बीच कोई "कमजोर समझौता" होता है, तो इससे ईरान को भविष्य में और शक्तिशाली होने का मौका मिल जाएगा। वहीं दूसरी ओर, यदि वार्ता विफल होती है और ट्रंप सीधे सैन्य कार्रवाई का रास्ता चुनते हैं, तो इज़राइल पर हिजबुल्लाह और ईरान के सीधे मिसाइल हमलों का सबसे बड़ा खतरा मंडराएगा।

ईरान का पलटवार: "धमकियों के आगे नहीं झुकेंगे"

ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची, जो जिनेवा पहुंच चुके हैं, ने साफ कर दिया है कि ईरान एक "न्यायसंगत समझौते" के लिए तैयार है, लेकिन किसी भी प्रकार के दबाव या समर्पण की बात मेज पर नहीं है। इस बीच, ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में सैन्य अभ्यास शुरू कर दिया है, जिसे अमेरिका के लिए एक सीधे संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।

क्या है 'फेज-2' का डर?

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि जिनेवा वार्ता विफल होती है, तो ट्रंप 'फेज-2' (Phase 2) रणनीति अपना सकते हैं। इसमें शामिल हो सकता है:

ईरान के तेल निर्यात को शून्य पर लाना।

परमाणु ठिकानों पर सीमित लेकिन विनाशकारी हमले।

ईरान के भीतर शासन परिवर्तन (Regime Change) के प्रयासों को खुला समर्थन।