पिंडदान का महाविज्ञान पूर्वजों की आत्मा तड़प रही है या शांत है? जानिए गया धाम में किए गए श्राद्ध की शक्ति
News India Live, Digital Desk: हम सब अपनी जिंदगी की भागदौड़ में इतने मशरूफ हैं कि अक्सर उन लोगों को भूल जाते हैं जिनकी वजह से हमारा वजूद है यानी हमारे पूर्वज। हिन्दू धर्म और खासकर गरुड़ पुराण में एक बात बहुत जोर देकर कही गई है कि जो संतान अपने पितरों का स्मरण नहीं करती, उसे जीवन में कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। लेकिन इन सब समस्याओं का एक ही परमानेंट इलाज बताया गया है, और वह है बिहार का पावन 'गया धाम'।
क्यों खास है गया जी का पिंडदान?
पौराणिक कथाओं के अनुसार, गया की धरती स्वयं भगवान विष्णु का रूप मानी जाती है। कहा जाता है कि गयासुर नाम के एक असुर ने भगवान से वरदान मांगा था कि जो भी उसे देख लेगा या स्पर्श कर लेगा, उसे मोक्ष मिल जाएगा। इसीलिए, गया में भगवान विष्णु के चरणों (विष्णुपद मंदिर) की पूजा होती है। गरुड़ पुराण कहता है कि यहाँ किया गया पिंडदान सीधा पूर्वजों को तृप्ति पहुँचाता है।
सात पीढ़ियों के उद्धार की कहानी
अक्सर लोग पूछते हैं कि पिंडदान से सिर्फ एक व्यक्ति का भला होता है या पूरे परिवार का? गरुड़ पुराण के अनुसार, जब कोई श्रद्धा भाव से गया जी में फल्गु नदी के किनारे पिंडदान करता है, तो उसके केवल पिता ही नहीं, बल्कि सात पीढ़ियों (मातृपक्ष, पितृपक्ष और ससुराल पक्ष) के पितर नरक की यातनाओं से मुक्त होकर सीधे वैकुंठ यानी मोक्ष की ओर प्रस्थान करते हैं। यह कोई अंधविश्वास नहीं, बल्कि एक गहरी आस्था है जो सदियों से भारत की जड़ों में बसी है।
पिंडदान का सही समय और तरीका
वैसे तो लोग सालों भर गया आते हैं, लेकिन पितृपक्ष (Pitru Paksha) के दौरान यहाँ का नजारा कुछ और ही होता है। गरुड़ पुराण के अनुसार, चावल या जौ के आटे से बने 'पिंड' को जब मंत्रोच्चार के साथ दान किया जाता है, तो पितर अदृश्य रूप में वहाँ मौजूद होते हैं और अपनी संतान को सुखी रहने का आशीर्वाद देते हैं।
पित्र दोष से मिलती है मुक्ति
आजकल बहुत से लोग कुंडली में पित्र दोष (Pitra Dosh) से परेशान रहते हैं—काम का न बनना, घर में हमेशा बीमारी या क्लेश रहना इसके संकेत हो सकते हैं। शास्त्रों के अनुसार, गया जी में किया गया एक विधिवत श्राद्ध आपके जीवन की इन बड़ी बाधाओं को हमेशा के लिए शांत कर सकता है। जब पितर खुश होते हैं, तो घर में धन-धान्य और खुशहाली खुद-ब-खुद आने लगती है।
अंत में बस यही...
पिंडदान केवल एक कर्मकांड नहीं है, बल्कि यह अपने पुरखों के प्रति हमारा 'थैंक यू' कहने का तरीका है। अगर मुमकिन हो, तो जीवन में एक बार गया जाकर अपने उन पूर्वजों के लिए प्रार्थना जरूर करें, जिन्होंने आज आपको यह सुंदर जीवन दिया है। आपकी एक छोटी सी कोशिश उनके भटके हुए रूह को मंजिल दिला सकती है।