Punjab Petrol Crisis : युद्ध के डर से पंजाब के पेट्रोल पंपों पर उमड़ी भारी भीड़ तेल खत्म होने की आशंका में रातभर लगी रहीं लंबी कतारें

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News India Live, Digital Desk: पंजाब में युद्ध की आहट और तेल की कमी की आशंका ने जनता के बीच भारी बेचैनी पैदा कर दी है। पंजाब के विभिन्न शहरों से पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारों और अफरा-तफरी की खबरें आ रही हैं। मध्य पूर्व (Middle East) में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव और होरमुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने की खबरों ने इस डर को और हवा दी है।

युद्ध का साया: क्यों घबराए हुए हैं पंजाब के लोग?

फारस की खाड़ी में ईरान द्वारा अमेरिकी तेल टैंकर पर मिसाइल हमले और उसके बाद वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित होने की खबरों ने पंजाब में 'पैनिक' (Panic) की स्थिति पैदा कर दी है।

स्टॉक करने की होड़: लोगों को डर है कि अगर युद्ध लंबा खिंचता है, तो आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल के दाम आसमान छू सकते हैं या सप्लाई पूरी तरह बंद हो सकती है।

अफवाहों का बाजार: सोशल मीडिया पर फैल रही 'सप्लाई बंद होने' की अपुष्ट खबरों ने आग में घी डालने का काम किया है, जिससे लोग अपनी गाड़ियों के साथ-साथ ड्रमों और बोतलों में भी तेल भरवाते नजर आ रहे हैं।

बठिंडा से अमृतसर तक पेट्रोल पंपों पर 'जाम'

[Image showing long queues of cars and motorcycles at a petrol station in Punjab at night] पंजाब के प्रमुख शहरों जैसे लुधियाना, जालंधर, बठिंडा और अमृतसर में कल रात से ही पेट्रोल पंपों पर वाहनों का हुजूम देखा जा रहा है।

घंटों का इंतजार: कई जगहों पर पेट्रोल पंपों पर 1-2 किलोमीटर लंबी लाइनें लग गई हैं।

पुलिस की तैनाती: कुछ संवेदनशील इलाकों में भीड़ को नियंत्रित करने और ट्रैफिक जाम खुलवाने के लिए पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा है।

'नो स्टॉक' के बोर्ड: अत्यधिक मांग के कारण कई छोटे पेट्रोल पंपों पर तेल खत्म हो गया है, जिससे वहां 'No Petrol/Diesel' के बोर्ड लटका दिए गए हैं।

सरकार और तेल कंपनियों का रुख: "घबराने की जरूरत नहीं"

बढ़ती अफरा-तफरी के बीच प्रशासन और पेट्रोल पंप डीलर्स एसोसिएशन ने जनता से शांति बनाए रखने की अपील की है।

पर्याप्त भंडार: केंद्र सरकार और तेल विपणन कंपनियों (OMCs) का दावा है कि भारत के पास पर्याप्त 'सामरिक तेल भंडार' (Strategic Reserves) है, जो कम से कम 25 दिनों की जरूरतों को पूरा कर सकता है।

रूस से मदद: भारत सरकार ने संकेत दिए हैं कि वह खाड़ी देशों के विकल्प के रूप में रूस से तेल आयात बढ़ाने पर विचार कर रही है, ताकि घरेलू बाजार में कमी न हो।

कीमतों पर नियंत्रण: फिलहाल सरकार ने रिटेल कीमतों में किसी बड़े बदलाव की घोषणा नहीं की है, ताकि महंगाई को नियंत्रित रखा जा सके।

एक्सपर्ट की राय: क्या वाकई आएगा संकट?

आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि होरमुज़ जलडमरूमध्य का बंद होना भारत के लिए चिंता का विषय जरूर है, क्योंकि हमारा 40% कच्चा तेल यहीं से आता है। हालांकि, तत्काल तेल खत्म होने जैसी कोई स्थिति नहीं है। यह वर्तमान संकट सप्लाई की कमी से ज्यादा 'पैनिक बाइंग' (Panic Buying) का नतीजा है।