सरकारी फाइल ने तो मार ही डाला ,अब हाथ में जिंदा हूँ का बोर्ड लेकर सड़कों पर क्यों घूम रहे हैं ये पार्षद जी?
News India Live, Digital Desk : कुछ ऐसा ही कड़वा अनुभव बिहार के छपरा (सारण) जिले में रिविलगंज नगर पंचायत के वार्ड संख्या-34 के पार्षद सतीश राज के साथ हुआ है। सतीश राज आज कल अपने हाथ में एक बड़ा सा पोस्टर लेकर अधिकारियों की चौखट और सड़कों पर घूम रहे हैं। उनके पोस्टर पर लिखा है "मैं वार्ड पार्षद सतीश राज, वार्ड-34, नगर पंचायत रिविलगंज... अभी जिंदा हूँ।"
पूरा माजरा क्या है?
दरअसल, निर्वाचन आयोग की ओर से आगामी नगर निकाय चुनाव और मतदाता सूची के नवीनीकरण का काम चल रहा था। इसी दौरान जब लिस्ट चेक की गई, तो वहां सतीश राज के नाम के आगे "मृत" (Dead) लिख दिया गया था। यानी सरकारी फाइलों में वह अब इस दुनिया में नहीं हैं।
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि सतीश राज 'सीटिंग' यानी वर्तमान वार्ड पार्षद हैं। जो व्यक्ति हर सरकारी बैठक में हिस्सा ले रहा है, अपने क्षेत्र के काम करवा रहा है और खुद सरकार के सिस्टम का एक हिस्सा है, उसे ही सिस्टम ने मारकर लिस्ट से हटा दिया।
फिल्म 'कागज' जैसी असलियत
आपने पंकज त्रिपाठी की फिल्म 'कागज' देखी होगी, जिसमें वो खुद को जिंदा साबित करने के लिए सालों संघर्ष करते हैं। छपरा के सतीश राज के साथ भी वही हो रहा है। जब उन्हें पता चला कि वह सरकारी फाइलों में "मर चुके" हैं, तो उन्होंने इसे विभाग की भारी लापरवाही करार दिया। उनका कहना है कि अगर एक जन प्रतिनिधि के साथ ऐसा हो सकता है, तो सोचिए आम जनता का क्या हाल होगा?
प्रशासन की बड़ी लापरवाही पर सवाल
यह घटना सिर्फ एक प्रिंटिंग की गलती नहीं है, बल्कि उस वेरिफिकेशन प्रोसेस पर सवाल उठाती है जहाँ किसी का नाम काटने से पहले उसे देखा या चेक तक नहीं किया गया। क्या मतदाता सूची बनाने वाले कर्मियों ने घर जाकर या पड़ोसियों से भी नहीं पूछा? क्या सतीश राज के काम और उनकी फाइलें नगरपालिका से पूरी तरह गायब हो गई थीं?
पार्षद की मांग: जिम्मेदार को मिले सजा
सतीश राज अब अपना विरोध इस अनोखे अंदाज़ में जता रहे हैं ताकि प्रशासन की आँखें खुलें। उन्होंने मांग की है कि जिसने भी ये गलत डेटा एंट्री की है या बिना वेरिफिकेशन के उन्हें "मृत" घोषित किया, उस पर कार्रवाई होनी चाहिए। उनका कहना है कि यह उनकी प्रतिष्ठा और वजूद की लड़ाई है।
यह कहानी सुनकर हंसी भी आती है और दुःख भी, क्योंकि जिस सिस्टम को पारदर्शी होना चाहिए, वही अक्सर ऐसे गंभीर ब्लंडर कर बैठता है।
आपकी राय?
क्या सरकारी लिस्ट बनाने वाले कर्मचारी सिर्फ कुर्सी पर बैठकर ही फाइलें भरते हैं? इस लापरवाही का जिम्मेदार आखिर कौन है? कमेंट्स में जरूर अपनी बात साझा करें।