सावधान! पेशाब रोकने की आदत बना सकती है आपको गंभीर बीमार, किडनी और ब्लैडर पर पड़ता है बुरा असर; जानें डॉक्टरों की चेतावनी

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नई दिल्ली/विशेष संवाददाता: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और ऑफिस के काम के दबाव में हम अक्सर अपने शरीर के संकेतों को नजरअंदाज कर देते हैं। इनमें से एक सबसे आम लेकिन खतरनाक आदत है—पेशाब को देर तक रोककर रखना। चाहे मीटिंग चल रही हो, सफर में हों या बस आलस की वजह से, लोग घंटों तक वॉशरूम जाने से बचते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी यह छोटी सी लापरवाही शरीर के भीतर 'टाइम बम' की तरह काम कर रही है? डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि पेशाब रोकने की यह आदत न केवल आपके ब्लैडर बल्कि आपकी किडनी को भी स्थायी रूप से नुकसान पहुंचा सकती है।

ब्लैडर और मांसपेशियों पर पड़ता है भारी दबाव

पेशाब के माध्यम से हमारा शरीर फालतू पानी और जहरीले टॉक्सिक पदार्थों को बाहर निकालता है। यह एक प्राकृतिक सफाई प्रक्रिया है। जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक पेशाब रोकता है, तो उसके ब्लैडर (मूत्राशय) में मूत्र का स्तर बढ़ जाता है, जिससे उसकी दीवारों पर अत्यधिक दबाव पड़ता है। लंबे समय तक ऐसा करने से ब्लैडर की मांसपेशियां कमजोर हो सकती हैं। एक बार जब ये मांसपेशियां ढीली पड़ जाती हैं, तो भविष्य में ब्लैडर को पूरी तरह खाली करने में दिक्कत होने लगती है, जो एक गंभीर समस्या बन सकती है।

यूटीआई (UTI) और संक्रमण का बढ़ जाता है खतरा

पेशाब को देर तक अंदर जमा रखने का मतलब है बैक्टीरिया को पनपने का न्योता देना। ब्लैडर में मौजूद गंदगी में बैक्टीरिया तेजी से बढ़ने लगते हैं, जिससे यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन यानी यूटीआई का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इसके लक्षणों में पेशाब के दौरान जलन, पेट के निचले हिस्से में तेज दर्द और बार-बार इन्फेक्शन होना शामिल है। विशेषज्ञों के अनुसार, जो लोग इस आदत को नहीं सुधारते, उनमें यह संक्रमण बार-बार लौटकर आता है और स्वास्थ्य को बुरी तरह प्रभावित करता है।

किडनी फेलियर और गंभीर बीमारियों का संकेत

पेशाब रोकने की आदत केवल ब्लैडर तक सीमित नहीं रहती। जब दबाव बहुत ज्यादा बढ़ जाता है, तो यूरिन वापस किडनी की ओर जाने की कोशिश कर सकता है, जिसे मेडिकल भाषा में 'वेसिकोयूरेटेरल रिफ्लक्स' कहते हैं। यह स्थिति किडनी में संक्रमण और सूजन पैदा कर सकती है। यदि यह आदत सालों तक बनी रहे, तो यह किडनी की कार्यक्षमता को कम कर सकती है या भविष्य में किडनी फेलियर जैसी जानलेवा स्थिति का कारण भी बन सकती है। इसलिए, शरीर जब भी संकेत दे, उसे तुरंत सुनना ही समझदारी है।

मजबूरी में पेशाब रोकना पड़े तो अपनाएं ये तरीके

कभी-कभी ऐसी परिस्थितियां आ जाती हैं जब आसपास वॉशरूम नहीं होता और पेशाब रोकना मजबूरी बन जाता है। ऐसी स्थिति में घबराने या ज्यादा हिलने-डुलने के बजाय एक जगह शांत बैठने की कोशिश करें। ज्यादा चलने-फिरने से मूत्राशय पर दबाव बढ़ता है। अपने दिमाग को किसी अन्य काम या संगीत में लगाकर ध्यान भटकाने की कोशिश करें। सबसे जरूरी बात यह है कि उस दौरान पानी या अन्य तरल पदार्थों का सेवन बिल्कुल न करें, ताकि ब्लैडर पर और लोड न बढ़े। हालांकि, ध्यान रहे कि यह केवल एक अस्थायी समाधान है; मौका मिलते ही ब्लैडर खाली करना जरूरी है।

क्या कहते हैं अस्पताल के सीनियर डॉक्टर?

लेडी हार्डिंग अस्पताल में मेडिसिन विभाग के डायरेक्टर एचओडी डॉ. एल.एच. घोटेकर बताते हैं कि पेशाब रोकना किसी भी सूरत में सही आदत नहीं है। वे कहते हैं, "शरीर जब पेशाब का सिग्नल देता है, तो वह एक जरूरी प्रक्रिया का हिस्सा होता है। इसे नजरअंदाज करने से न केवल संक्रमण बढ़ता है, बल्कि ब्लैडर की कार्यक्षमता पर भी बुरा असर पड़ता है।" डॉक्टर सलाह देते हैं कि यदि आपको पेशाब के दौरान जलन, दर्द या पेट के निचले हिस्से में असहजता महसूस हो, तो इसे मामूली समझकर इग्नोर न करें और तुरंत विशेषज्ञ से सलाह लें।