LPG Crisis : कतर की गैस हुई दोगुनी महंगी, अब अमेरिका से आएगा ईंधन, जानें भारत में कब तक रहेगा एलपीजी संकट

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News India Live, Digital Desk: मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव का सीधा असर अब भारत की रसोई और रेस्टोरेंट्स पर दिखने लगा है। कतर से भारत आने वाली प्राकृतिक गैस (Natural Gas) की कीमतों में अचानक भारी उछाल आया है और यह दोगुनी तक महंगी हो गई है। ऐसे में भारत सरकार अब कतर की जगह अमेरिका और नॉर्वे जैसे देशों से गैस आयात करने पर विचार कर रही है। उधर, देश के कई बड़े शहरों में एलपीजी (LPG) की किल्लत के चलते होटलों और रेस्टोरेंट्स पर ताला लटकने की नौबत आ गई है। आइए जानते हैं कि यह पूरा संकट क्या है और आम आदमी पर इसका क्या असर होने वाला है।

कतर का गणित बिगड़ा, अमेरिका और नॉर्वे बने नया विकल्प आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, भारत अब तक कतर से 6 से 8 डॉलर प्रति MMBTU (Metric Million British Thermal Unit) की दर से गैस खरीद रहा था। लेकिन मौजूदा हालात में यह कीमत उछलकर 15 डॉलर प्रति MMBTU तक पहुंच गई है। ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि जब भी गैस की कीमत 10 डॉलर के पार जाती है, तो ज्यादा दूरी के बावजूद अमेरिका और नॉर्वे से गैस मंगाना भारत के लिए आर्थिक रूप से अधिक फायदेमंद होता है। हालांकि, दूरी अधिक होने के कारण वहां से जहाजों के जरिए गैस की खेप भारत पहुंचने में करीब दो महीने का समय लग सकता है।

होटल और रेस्टोरेंट इंडस्ट्री पर मंडराया बंदी का खतरा कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों (Commercial LPG) की अचानक हुई कमी ने होटल कारोबारियों की नींद उड़ा दी है। मुंबई, पुणे और बेंगलुरु जैसे महानगरों में होटल एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि अगर अगले एक-दो दिन में गैस की सप्लाई सामान्य नहीं हुई, तो उन्हें मजबूरी में अपने कामकाज बंद करने पड़ेंगे।

आम जनता को घबराने की जरूरत नहीं, सरकार ने बनाया खास प्लान जहां एक तरफ इंडस्ट्रीज परेशान हैं, वहीं आम घरों के लिए राहत की खबर है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि घरेलू उपभोक्ताओं (Domestic LPG) को गैस की सप्लाई में कोई रुकावट नहीं आएगी। इसके लिए सरकार ने कई बड़े कदम उठाए हैं:

उत्पादन में इजाफा: एलपीजी के उत्पादन को तत्काल प्रभाव से 10 फीसदी तक बढ़ा दिया गया है।

घरों को पहली प्राथमिकता: उद्योगों के मुकाबले घरों तक रसोई गैस (LPG) और पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) की सप्लाई को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।

कमेटी का गठन: कमर्शियल गैस की किल्लत से निपटने के लिए पेट्रोलियम मंत्रालय ने एक विशेष समिति बनाई है। यह समिति देश के विभिन्न शहरों में होटल और रेस्टोरेंट की वास्तविक जरूरतों का आकलन कर उन्हें गैस उपलब्ध कराएगी।

कब तक टलेगा यह गैस संकट? सरकारी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि भारत में गैस और ईंधन की कोई लंबी कमी नहीं होने वाली है। एलएनजी (LNG) और एलपीजी दोनों की सप्लाई पाइपलाइन में है। नए देशों से सप्लाई चेन सेट होने और डिलीवरी पहुंचने में थोड़ा वक्त जरूर लग सकता है, लेकिन यह संकट पूरी तरह से अस्थायी है। जैसे ही अमेरिका और नॉर्वे से गैस की खेप भारत पहुंचेगी, आपूर्ति पूरी तरह से सामान्य हो जाएगी।