ईरान-इजरायल युद्ध के बीच भारत में ईंधन का संकट? सरकार बोली घबराइए मत तेल और गैस की कोई कमी नहीं
News India Live, Digital Desk: पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी भीषण संघर्ष और ईरान-इजरायल युद्ध की आहट ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल पैदा कर दी है। भारत अपनी तेल जरूरतों का लगभग 80-90% हिस्सा इन्हीं खाड़ी देशों से आयात करता है, ऐसे में सप्लाई चेन बाधित होने की आशंकाओं ने कमर्शियल एलपीजी (LPG) और तेल की कीमतों को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। हालांकि, केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में ईंधन की कोई कमी नहीं है और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है।
सरकार ने दिया आश्वासन: 'नजरें टिकी हैं, घबराने की जरूरत नहीं'
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने देशवासियों और विशेष रूप से होटल-रेस्टोरेंट संचालकों से अपील की है कि वे पैनिक न करें। मंत्रियों ने साफ किया है कि:
निगरानी: सरकार और संबंधित विभाग वैश्विक घटनाक्रमों पर हर मिनट नजर रख रहे हैं।
सुरक्षित सप्लाई: वैकल्पिक व्यापार मार्गों की तलाश की जा रही है ताकि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में होने वाली किसी भी बाधा का असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर न पड़े।
पेट्रोलियम मंत्रालय की पहल: केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं ताकि घरेलू बाजारों में पेट्रोलियम उत्पादों की निर्बाध उपलब्धता बनी रहे।
आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act) लागू
सरकार ने एहतियात के तौर पर 'आवश्यक वस्तु अधिनियम' लागू कर दिया है। इसके तहत रिफाइनरियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे एलपीजी उत्पादन को अधिकतम करें। सरकार ने आपूर्ति के लिए एक नया प्राथमिकता ढांचा तैयार किया है:
घरेलू उपभोक्ता (Top Priority): घरों में मिलने वाली पाइप वाली गैस (PNG) और वाहनों के लिए सीएनजी (CNG) की 100% आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।
उद्योग (80% आपूर्ति): विनिर्माण क्षेत्रों और औद्योगिक इकाइयों को उनकी औसत खपत का 80% हिस्सा मिलता रहेगा।
उर्वरक संयंत्र (70% आपूर्ति): खेती-किसानी प्रभावित न हो, इसके लिए खाद कारखानों को 70% गैस आवंटित की गई है।
क्यों पैदा हुई चिंता?
भारत का लगभग 30% प्राकृतिक गैस आयात होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। युद्ध के कारण इस समुद्री मार्ग पर ड्रोन और मिसाइल हमलों का खतरा बढ़ गया है। इसी वजह से कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की किल्लत की खबरें आ रही थीं, जिससे छोटे रेस्टोरेंट और होटल कारोबारी परेशान थे।
नौसेना की तैयारी
रिपोर्ट्स के अनुसार, खाड़ी क्षेत्र में फंसे भारतीय तेल टैंकरों और मालवाहक जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए भारतीय नौसेना अपने युद्धपोत (Warships) भेजने पर भी विचार कर रही है। सरकार का लक्ष्य है कि अंतरराष्ट्रीय तनाव का असर आम भारतीय की रसोई और जेब पर न पड़े।