अंडर-19 वर्ल्ड कप की सबसे बड़ी सीक्रेट प्लानिंग ,कैसे पाकिस्तान ने तय किया कि जिम्बाब्वे ही अगले दौर में जाएगा
News India Live, Digital Desk: क्रिकेट के खेल में अक्सर कहा जाता है कि सारा रोमांच आखिरी गेंद तक रहता है, लेकिन कभी-कभी असली खेल बाउंड्री के पार दिमागों में चल रहा होता है। अंडर-19 वर्ल्ड कप में भी कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जहाँ पाकिस्तान की एक सोची-समझी रणनीति ने सारा ध्यान अपनी ओर खींच लिया। क्रिकेट गलियारों में इस बात की बड़ी चर्चा है कि कैसे पाकिस्तान ने अपनी 'स्मार्ट' प्लानिंग के जरिए जिम्बाब्वे का अगले दौर का रास्ता आसान कर दिया।
अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर कोई टीम किसी दूसरी टीम की मदद क्यों करेगी? दरअसल, टूर्नामेंट के समीकरण कुछ ऐसे बने हुए थे कि पाकिस्तान के लिए अपनी जीत से ज्यादा इस बात का महत्व था कि कौन सी दूसरी टीम उनके साथ क्वालीफाई करती है। इसे 'चतुराई' कहिए या मैच का सही आंकलन, पाकिस्तान ने कुछ इस तरह से मैच के उतार-चढ़ाव को कंट्रोल किया जिससे जिम्बाब्वे का नेट रन रेट बेहतर हो जाए या उनकी जगह पक्की हो जाए।
अक्सर टूर्नामेंट में बड़ी टीमें चाहती हैं कि नॉकआउट मुकाबलों या सुपर स्टेज में उनके सामने ऐसी टीमें रहें जिनके खिलाफ उनकी जीत की संभावना ज्यादा हो, या फिर कोई 'बड़ा खतरा' पहले ही टूर्नामेंट से बाहर हो जाए। पाकिस्तान के इस कदम को भी उसी नजरिए से देखा जा रहा है। खेल प्रेमियों के लिए ये थोड़ा पेचीदा लग सकता है, लेकिन क्रिकेट के जानकारों का कहना है कि बड़े टूर्नामेंट जीतने के लिए सिर्फ बल्ले और गेंद से नहीं, बल्कि ऐसे कैलकुलेशन से भी लड़ना पड़ता है।
इस पूरे मामले ने आईसीसी (ICC) के नियमों और टूर्नामेंट के फॉर्मेट पर भी बहस छेड़ दी है। हालांकि, इसमें कुछ भी गैर-कानूनी नहीं है, पर फिर भी पाकिस्तान के इस तरीके ने सबको सोचने पर मजबूर कर दिया कि क्या भविष्य में इसे रोकने के लिए नियमों में कोई बदलाव होगा। आपका क्या मानना है, क्या जीत हासिल करने के लिए ऐसी कूटनीति अपनाना सही है? आखिर मैच के साथ-साथ ये दिमागी लड़ाई भी तो क्रिकेट का ही एक हिस्सा है।